ट्रेनों में निर्धारित चार से अधिक 16 से 18 तक वेंडर पाए जाने पर आईकार्ड की वैधता पर उठे गंभीर सवाल
उज्जैन रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों में खानपान सामग्री बेचने वाले वेंडरों के भेष में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। रेलवे की ट्रेन साइड वेंडिंग (टीएसवी) योजना के तहत निर्धारित संख्या से कहीं अधिक वेंडर ट्रेनों में यात्रियों को सामग्री बेचते पाए गए। इस योजना के अनुसार, एक ट्रेन में अधिकतम चार वेंडरों को ही काम करने की अनुमति है, लेकिन जांच के दौरान कुछ ट्रेनों में 16, 17 और 18 तक वेंडर यात्रियों को सामान बेचते मिले। उज्जैन रेलवे स्टेशन पर करीब 50 संदिग्ध वेंडरों को पकड़ा गया है, जिनके पास से आईकार्ड भी जब्त किए गए हैं। इन आईकार्ड की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं, और यह पता लगाया जा रहा है कि क्या ये कार्ड फर्जी हैं या फिर रेलवे की अधिकृत सूची में नाम न होने के बावजूद इनका इस्तेमाल किया जा रहा था। रेलवे का वाणिज्य विभाग इन कार्डों और वेंडरों के नामों का अधिकृत सूची से मिलान कर रहा है, जबकि आरपीएफ ने भी अनधिकृत वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही फर्जी कार्डों और बिना अनुमति काम करने वाले लोगों की संख्या स्पष्ट हो पाएगी। रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार, रतलाम मंडल में टीएसवी योजना का ठेका कौशल इंटरप्राइजेज को तीन साल के लिए लगभग 90 लाख रुपये में दिया गया था। इस ठेके की अवधि 29 दिसंबर 2025 से 28 दिसंबर 2028 तक है। इस योजना के तहत, प्रीमियम ट्रेनों को छोड़कर अन्य ट्रेनों में यात्रियों को खानपान और अन्य आवश्यक सामान बेचने के लिए निर्धारित संख्या में वेंडर काम कर सकते हैं। टेंडर की शर्तों के अनुसार, एक ट्रेन में अधिकतम चार वेंडर ही अधिकृत हैं। प्रत्येक वेंडर के पास एक अधिकृत आईकार्ड, निर्धारित वर्दी और आवश्यक मेडिकल दस्तावेज होने चाहिए। लेकिन, बुधवार दोपहर 3 बजे के करीब आरपीएफ के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त अमित प्रकाश मिश्र ने बताया कि उन्होंने इस मामले में सामने आई अनियमितताओं की रिपोर्ट अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी है। उनके अनुसार, रेलवे की शर्तों का उल्लंघन करते हुए कुछ ट्रेनों में चार से अधिक, बल्कि 16, 17 और 18 तक वेंडर काम करते पाए गए। रेलवे द्वारा अधिकृत वेंडरों की एक सूची वाणिज्य विभाग जारी करता है। इस सूची में जिन लोगों के नाम शामिल नहीं होते, उन्हें अनधिकृत माना जाता है। अमित प्रकाश मिश्र ने बताया कि जिन लोगों के पास आईकार्ड मिले हैं, उनकी वैधता की जांच वाणिज्य विभाग द्वारा की जानी है। इस संबंध में उन्होंने वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आईकार्ड का होना रेलवे में वेंडिंग की अनुमति का प्रमाण नहीं है। सहायक सुरक्षा आयुक्त उज्जैन राजीव उपाध्याय ने बताया कि आरपीएफ अनधिकृत वेंडरों के खिलाफ पहले से कार्रवाई करती आ रही है। पहले वेंडरों की अद्यतन सूची उपलब्ध न होने से जांच में कठिनाई होती थी, लेकिन अब वाणिज्य विभाग ने वर्तमान में काम कर रहे अधिकृत वेंडरों की सूची अपडेट कर दी है। इस अद्यतन सूची के आधार पर जांच की जा रही है। यदि किसी व्यक्ति के पास आईकार्ड है, लेकिन उसका नाम अधिकृत सूची में नहीं है, तो उसे अनधिकृत मानकर कार्रवाई की जाएगी। यह महत्वपूर्ण है कि केवल आईकार्ड होने से किसी व्यक्ति को रेलवे में वेंडिंग करने की अनुमति नहीं मिल जाती। वेंडरों के आईकार्ड पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करने पर संबंधित व्यक्ति का नाम, पिता का नाम और कार्ड नंबर जैसी जानकारी प्राप्त होती है। इसके बाद, इन जानकारियों का वाणिज्य विभाग द्वारा जारी की गई अधिकृत सूची से मिलान किया जाता है। कुछ कार्डों पर मेडिकल और ब्लड ग्रुप संबंधी जानकारियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। राजीव उपाध्याय ने बताया कि मेडिकल कराने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है और यह रेलवे के डॉक्टर से कराया जाना चाहिए। हालांकि, मेडिकल दस्तावेजों की वास्तविकता और कार्ड की वैधता की पुष्टि संबंधित विभाग को ही करनी होगी। उज्जैन रेलवे स्टेशन पर लगभग 50 संदिग्ध वेंडरों को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इनमें से कितने लोगों को हिरासत में लिया गया, कितनों के खिलाफ रेलवे अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया और कितनों को जांच के बाद रिहा किया गया, इसकी आधिकारिक संख्या अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। सहायक सुरक्षा आयुक्त राजीव उपाध्याय ने बताया कि मंडल के विभिन्न स्टेशनों और आरपीएफ चौकियों पर कार्रवाई की जा रही है, और कुल कार्रवाई के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।
