नगर निगम आयुक्त ने फोन रिसीव नहीं किया, मंदिर प्रशासन का पक्ष भी नहीं मिला
उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने पिछले 5 दिनों से नाली का गंदा पानी जमा है। सड़क चौड़ीकरण के काम के दौरान नाली के एक हिस्से को तोड़े जाने के बाद से पानी की निकासी बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस कारण मंदिर मार्ग पर करीब एक दर्जन फूल-प्रसाद की दुकानें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं, जिससे दुकानदारों के कारोबार पर असर पड़ रहा है। श्रद्धालुओं को भी गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है, जिससे वे नाराज हैं। सिंहस्थ 2028 को लेकर चल रहे निर्माण और सड़क चौड़ीकरण के कार्यों के चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई है। नाली के एक हिस्से को सड़क की जद में आने के कारण तोड़ा गया था, जिसके बाद से पानी का बहाव रुक गया और गंदा पानी सड़क और दुकानों के आसपास जमा होने लगा। पिछले पांच दिनों से स्थिति जस की तस बनी हुई है। गंदे पानी के जमावड़े से यहां फूल-प्रसाद की दुकानें चलाने वाले लगभग एक दर्जन दुकानदार प्रभावित हैं। श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही के बावजूद, गंदगी और जलभराव ने उनके व्यवसाय को चौपट कर दिया है। दुकानदारों का कहना है कि इस स्थिति से न केवल उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि मंदिर आने वाले भक्तों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शाजापुर से दर्शन करने आए कुणाल सिंह ने मंदिर गेट नंबर-1 के पास की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नाली के गंदे पानी के बीच संचालित हो रही फूल-माला की दुकानों को देखकर उन्हें अच्छा नहीं लगा। भक्तों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली इस गंदगी को उन्होंने अविलंब साफ करने और पानी की निकासी व्यवस्था सुधारने की मांग की।
उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के पास 5 दिनों से नाली का गंदा पानी जमा होने से श्रद्धालु और दुकानदार परेशान, धार्मिक स्थल पर गंदगी से भक्तों की भावनाएं आहत
इस कारण नगर निगम का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका। मंदिर प्रशासन से भी इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। महाकालेश्वर मंदिर जैसे पवित्र स्थल के पास इस तरह की गंदगी और जलभराव की स्थिति भक्तों के मन में रोष पैदा कर रही है। धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखने के लिए अविलंब सफाई और जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करना आवश्यक है। सड़क चौड़ीकरण के काम के दौरान नाली को नुकसान पहुंचाना और उसके बाद पानी की निकासी का इंतजाम न करना, प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। इस समस्या का जल्द समाधान न होने पर श्रद्धालुओं और दुकानदारों की परेशानी और बढ़ सकती है।

