भोपाल पहले स्थान पर रहा
मध्य प्रदेश में अपराधियों से मुकाबला करना पुलिसकर्मियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अपराधियों को पकड़ने या उनसे निपटने के लिए पहुंचने वाली पुलिस टीमों पर हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच प्रदेश में पुलिसकर्मियों पर हमले की 461 घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं में पांच पुलिसकर्मियों की जान चली गई, जबकि 612 जवान घायल हुए। यह आंकड़े बताते हैं कि औसतन हर दिन पुलिस पर हमले की एक घटना सामने आई है। राजधानी भोपाल हमलों के मामले में प्रदेश में पहले स्थान पर है। यहां 28 घटनाएं हुईं, जिनमें 30 पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद राजगढ़ में 26 घटनाएं दर्ज की गईं और 40 पुलिसकर्मी घायल हुए। इंदौर में पुलिस पर हमले की 23 घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान आने वाली चुनौतियों को गंभीर रूप से उजागर किया है। अन्य जिलों में भी पुलिस पर हमले की घटनाएं चिंताजनक हैं। ग्वालियर और श्योपुर में 19-19 घटनाएं हुईं। टीकमगढ़ में 17 घटनाएं दर्ज की गईं। गुना और सिंगरौली में 15-15 घटनाएं हुईं, जबकि उज्जैन और जबलपुर में 14-14 घटनाएं दर्ज की गईं। गुना में हमलों की संख्या 15 रही, लेकिन यहां 40 पुलिसकर्मी घायल हुए। राजगढ़ और गुना में पुलिस टीमों पर हमलों के दौरान बड़ी संख्या में जवानों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिस बल को गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है। पांच जिलों में गई जवानों की जान: पुलिस पर हमलों के दौरान छिंदवाड़ा, शहडोल, सतना, मऊगंज और सिवनी में एक-एक पुलिसकर्मी की मौत हुई। यह घटनाएं पुलिस बल के लिए एक बड़ा झटका हैं और उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े करती हैं। कुल मिलाकर प्रदेशभर में 612 पुलिसकर्मी घायल हुए। यह स्थिति प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी प्रकाश डालती है। अपराधियों के बढ़ते हौसले और पुलिस पर बढ़ते हमले, कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रहे हैं। इन घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस को और अधिक सुरक्षा उपायों और बेहतर रणनीति की आवश्यकता है।

