दिवाली पर उज्जैन के प्राचीन गजलक्ष्मी मंदिर में 40 लाख रुपये के नोटों से सजावट होगी, 5100 लीटर दूध से होगा मां का अभिषेक
उज्जैन के नई पेठ स्थित प्राचीन मां गजलक्ष्मी मंदिर में दिवाली पर्व पर 40 लाख रुपये के नोटों से सजावट की जाएगी। इसकी शुरुआत धनतेरस से होगी और इसके लिए मंदिर में नोटों की लड़ियां बनाने का काम शुरू हो चुका है। मंदिर के भक्तों ने सजावट के लिए यह राशि दान की है। दिवाली के दिन मां गजलक्ष्मी का 5100 लीटर दूध से अभिषेक किया जाएगा। पूजन के बाद यह दूध भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटा जाएगा। पंडित अवधेश शर्मा के अनुसार, मान्यता है कि गजलक्ष्मी मंदिर करीब 2 हजार साल पुराना है। पुराने शहर के नई पेठ में स्थित इस मंदिर में दिवाली के दिन सुबह से ही मां लक्ष्मी का दूध से अभिषेक किया जाएगा। इस दौरान भक्त अपने साथ दूध और कमल का फूल लेकर आएंगे और माता को अर्पित करेंगे। 8 नवंबर रविवार को रात 2 बजे तक माता के दर्शन संभव होंगे। इसके बाद सुहाग पड़वा के पूजन की तैयारी शुरू हो जाएगी। इस मंदिर के गर्भगृह और परिसर को नोटों से सजाया जाएगा। इसके लिए मंदिर के 100 लोगों ने मिलकर नोट एकत्रित किए हैं। कुल 40 लाख रुपये के नोटों से यह विशेष सजावट की जाएगी। मंदिर की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसमें 8 गार्ड और 6 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। यह सजावट रतलाम के लक्ष्मी मंदिर की तर्ज पर की जा रही है। पुजारी अवधेश शर्मा ने बताया कि मां गजलक्ष्मी की प्रतिमा एक ही पाषाण पर निर्मित स्फटिक से बनी है। इसे करीब 2 हजार साल पुराना और सम्राट विक्रमादित्य के समय का बताया जाता है। माता की प्रतिमा ऐरावत हाथी पर सवार पद्मासन मुद्रा में विराजमान हैं। ऐसी मान्यता है कि सम्राट विक्रमादित्य मां गजलक्ष्मी को अपनी राजलक्ष्मी मानकर उनका पूजन करते थे। मंदिर में मां गजलक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की एक दुर्लभ प्रतिमा भी विराजित है। यह प्रतिमा काले पाषाण से निर्मित है और इसमें भगवान विष्णु के 24 अवतारों का वर्णन छोटे-छोटे रूपों में किया गया है। मंदिर आने वाले श्रद्धालु मां गजलक्ष्मी के दर्शन के साथ-साथ भगवान विष्णु के भी दर्शन करते हैं। यह अनूठी प्रतिमा देश के किसी अन्य मंदिर में नहीं पाई जाती है। धनतेरस से शुरू होने वाली इस सजावट में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। 40 लाख रुपये के नोटों से मां गजलक्ष्मी को सजाने की यह परंपरा भक्तों की गहरी आस्था का प्रतीक है। दूध अभिषेक के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि अधिक से अधिक भक्त प्रसाद स्वरूप दूध प्राप्त कर सकें। यह आयोजन उज्जैन के धार्मिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 2 हजार साल पुराने इस प्राचीन मंदिर में होने वाले ये विशेष पूजन और सजावट दिवाली के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए एक अनूठा अनुभव प्रदान करेंगे। मंदिर प्रशासन ने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली हैं।

