राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड ने धीमी गति के चलते पुरानी कंपनी का ठेका निरस्त किया, बीओटी मॉडल पर नया टेंडर जारी
उज्जैन में रेलवे स्टेशन से महाकाल लोक तक प्रस्तावित रोप-वे प्रोजेक्ट का 199 करोड़ रुपए का पुराना ठेका निरस्त कर दिया गया है। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) ने यह निर्णय पुरानी कंपनी द्वारा तय गति से काम नहीं करने के कारण लिया है। इसके एवज में 258.37 करोड़ रुपए का नया टेंडर जारी किया गया है, जिसमें बीओटी (बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) मॉडल अपनाया जाएगा। इस मॉडल के तहत, निर्माण से लेकर संचालन तक की पूरी जिम्मेदारी नई ठेका कंपनी की होगी, जिससे सरकार पर सीधे बजट खर्च का भार नहीं पड़ेगा। ओडिशा की कंपनी मेसर्स इंफ्रा इंजीनियर्स को पहले 199 करोड़ रुपए में यह ठेका दिया गया था। कंपनी ने कुछ निर्माण गतिविधियां शुरू भी की थीं, लेकिन काम की धीमी गति के चलते एनएचएलएमएल ने ठेका समाप्त करने का फैसला किया। ठेका निरस्त करने की औपचारिक प्रक्रिया चल रही है और पत्र जारी होने के बाद नया टेंडर खोला जाएगा। नई कंपनी अपने स्वयं के खर्च पर रोप-वे का निर्माण करेगी और तय अवधि तक इसका संचालन भी संभालेगी। यात्रियों से प्राप्त शुल्क से कंपनी अपनी लागत वसूल करेगी और मुनाफा कमाएगी। अनुबंध की अवधि समाप्त होने पर यह पूरा प्रोजेक्ट सरकार को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। नए टेंडर में लागत बढ़कर 258.37 करोड़ रुपए हो गई है। एनएचएलएमएल के अधिकारियों के अनुसार, पुराने 199 करोड़ रुपए के टेंडर में 18 प्रतिशत जीएसटी जोड़ने पर राशि लगभग 235 करोड़ रुपए हो जाती है। इसके अतिरिक्त, नए एसओआर (शेड्यूल ऑफ रेट्स) के अनुसार लागत में करीब 5 प्रतिशत की और वृद्धि हुई है। इस प्रकार, पुराने और नए टेंडर की वास्तविक लागत के बीच लगभग 20 करोड़ रुपए का अंतर सामने आ रहा है।

