कहते हैं कि सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती, जरूरत होती है तो सिर्फ दृढ़ इच्छाशक्ति और हौसले की। इस बात को मध्य प्रदेश की बंटी ने अपनी मेहनत और लगन से सच कर दिखाया है। आठवीं कक्षा के बाद परिस्थितियों के कारण पढ़ाई छोड़ने वाली बंटी ने लगभग 14 साल बाद 27 वर्ष की उम्र में फिर से शिक्षा की राह पकड़ी और मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड (एमपीएसओएस) की परीक्षा में 73.6 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। बंटी को बचपन से ही पढ़ाई का शौक था। उसका सपना पुलिस बल में शामिल होकर समाज की सेवा करने का था, लेकिन गांव के आसपास माध्यमिक विद्यालय की सुविधा नहीं होने के कारण आठवीं कक्षा के बाद उसकी पढ़ाई छूट गई। इसके बाद शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते वह शिक्षा से दूर होती चली गई। समय बीतने के साथ उसे लगने लगा था कि अब उसके सपने शायद पूरे नहीं हो पाएंगे। इसी दौरान एजुकेट गर्ल्स संस्था के प्रगति कार्यक्रम के माध्यम से बंटी की पहचान हुई। गांव में संचालित प्रगति लर्निंग कैंप ने उसे दोबारा पढ़ाई शुरू करने का अवसर दिया। शुरुआत में बंटी के सामने कई चुनौतियां थीं। परिवार की असहमति, घर की जिम्मेदारियां और सामाजिक ताने उसके रास्ते में बाधा बने। उसे यह चिंता भी थी कि इतने वर्षों बाद क्या वह दोबारा पढ़ाई कर पाएगी। हालांकि, संस्था की टीम ने लगातार उसका मार्गदर्शन किया और उसका हौसला बढ़ाया। परिवार को समझाने के बाद उसे पढ़ाई जारी रखने की अनुमति मिली। इसके बाद बंटी ने अपनी दिनचर्या में बदलाव किया। वह सुबह जल्दी उठकर घर के सभी काम पूरे करती और फिर पढ़ाई के लिए कैंप पहुंचती। कई बार पारिवारिक कार्यक्रमों और अन्य जिम्मेदारियों के बीच भी उसने पढ़ाई के लिए समय निकाला। यहां तक कि अपने भाई की शादी के अगले दिन भी वह पढ़ाई करने कैंप पहुंच गई। उसका मानना था कि परिवार के साथ समय बिताने के अवसर आगे भी मिलेंगे, लेकिन परीक्षा की तैयारी का अवसर बार-बार नहीं मिलेगा। उसकी नियमित उपस्थिति, अनुशासन और मेहनत ने धीरे-धीरे उसे आत्मविश्वास से भर दिया। जून 2025 में बंटी ने मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा दी। परीक्षा परिणाम आया तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने 73.6 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि केवल उसकी शैक्षणिक सफलता नहीं, बल्कि उन तमाम महिलाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं। अपनी सफलता पर बंटी कहती है कि उसने कभी नहीं सोचा था कि शादी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उसे दोबारा पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। आठवीं के बाद पढ़ाई छूटने से उसे लगता था कि अब जीवन यहीं तक सीमित है, लेकिन एजुकेट गर्ल्स संस्था के प्रगति कार्यक्रम ने उसके सपनों को फिर से जगा दिया। शुरुआत में परिवार की असहमति और समाज के ताने सुनने पड़े, लेकिन संस्था की टीम के सहयोग और अपने मजबूत इरादों से उसने हार नहीं मानी। आज प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करना उसके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। वह इसे केवल अपनी नहीं, बल्कि पूरे गांव की जीत मानती है। बंटी अब 12वीं कक्षा में प्रवेश लेकर आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती है। उसका बचपन का सपना आज भी कायम है। वह पुलिस बल में शामिल होकर समाज की सेवा करना चाहती है। यदि परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं, तो वह स्थानीय आंगनवाड़ी में शिक्षिका के रूप में काम कर बच्चों के भविष्य को संवारने की इच्छा रखती है। बंटी का संदेश है कि किसी भी महिला या बेटी के लिए अपने सपनों को पूरा करने में उम्र कभी बाधा नहीं बननी चाहिए। यदि इरादे मजबूत हों और अवसर मिले, तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत की जा सकती है। शिक्षा ने बंटी को सिर्फ परीक्षा में सफलता नहीं दिलाई, बल्कि उसे अपनी पहचान, क्षमता और सपनों पर दोबारा विश्वास करना भी सिखाया है। यह कहानी उन सभी के लिए एक मिसाल है जो मानते हैं कि परिस्थितियां उनके सपनों के आड़े आ सकती हैं। बंटी ने साबित किया है कि दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। एजुकेट गर्ल्स संस्था का प्रगति कार्यक्रम उन महिलाओं और लड़कियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ है जो अपनी शिक्षा अधूरी छोड़ चुकी हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें न केवल अकादमिक सहायता मिलती है, बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत बाधाओं से लड़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है। बंटी की सफलता इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति के जीवन को बदल सकती है, चाहे उसकी उम्र या परिस्थितियां कुछ भी हों।
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जिम्मेदारियों के बीच बंटी ने 14 साल बाद की पढ़ाई, प्रदेश में किया टॉप
4 नवंबर 2026 को 11:05 pm बजे

जिम्मेदारियों के बीच बंटी ने 14 साल बाद की पढ़ाई, प्रदेश में किया टॉप
