प्रदेश के 14 जिलों में लगभग 68 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से 50 सीटर क्षमता वाले 16 नवीन छात्रावासों का निर्माण 2 वर्ष में पूरा होगा। इनमें स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी, कंप्यूटर और कोचिंग कक्ष की सुविधाएं होंगी उपलब्ध
प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से राज्य शासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत प्रदेश के 14 जिलों में लगभग 68 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से 16 नवीन छात्रावास भवनों का निर्माण किया जाएगा। इन आधुनिक छात्रावासों में 50 सीटर की क्षमता होगी। यह निर्माण कार्य आगामी 2 वर्ष में पूरा हो जाएगा। प्रत्येक छात्रावास भवन के निर्माण पर लगभग 4 करोड़ 29 लाख 99 हज़ार रुपये खर्च होंगे। निर्माण 1401.20 वर्ग मीटर के बिल्ट-अप एरिया में होगा, जो कि निर्धारित मानकों के अनुरूप है। इन सर्वसुविधायुक्त छात्रावासों में विद्यार्थियों की पढ़ाई और रहने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं होंगी। मुख्य भवन में 25 आवासीय कक्ष, एक डाइनिंग हॉल, किचन, स्टोर रूम, एक आधुनिक लाइब्रेरी, कंप्यूटर कक्ष और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग कक्ष का निर्माण शामिल है। इसके अलावा, परिसर में छात्रावास अधीक्षक के लिए एक अलग आवासीय गृह, चौकीदार कक्ष और 3 यूनिट वाले सुव्यवस्थित शौचालय एवं स्नानागार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। यह सुनिश्चित करेगा कि विद्यार्थियों को एक सुरक्षित और आरामदायक वातावरण मिले। ये छात्रावास केवल रहने की जगह नहीं होंगे, बल्कि ये आधुनिक तकनीक और उच्च स्तरीय सुविधाओं से भी लैस होंगे। विद्यार्थियों की डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इंटरएक्टिव पैनल लगाए जाएंगे। परिसर की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, पक्की बाउंड्री वॉल और सुगम पहुंच के लिए एप्रोच रोड का भी प्रावधान किया गया है। यह कदम विद्यार्थियों के लिए एक सुरक्षित और आधुनिक शिक्षण अनुभव सुनिश्चित करेगा। आधुनिक सुविधाओं में शुद्ध पेयजल के लिए वाटर प्यूरीफायर (आरओ) की व्यवस्था होगी। निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए इन्वर्टर और सोलर वाटर हीटिंग सिस्टम भी लगाए जाएंगे। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर और आवश्यक फर्नीचर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। यह प्रयास विद्यार्थियों के दैनिक जीवन को सुगम और आरामदायक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जल संरक्षण के महत्व को समझते हुए, सभी छात्रावासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य रूप से स्थापित किया जाएगा। यह पर्यावरण के अनुकूल संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देगा और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि छात्रावासें न केवल आधुनिक हों बल्कि पर्यावरण के प्रति भी जिम्मेदार हों। राज्य शासन का यह निर्णय अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह राज्य सरकार की समावेशी विकास की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
