आरोपियों ने सोने-चांदी के जेवर और नकदी ऐंठकर गोल्ड लोन कंपनियों में गिरवी रखे
भोपाल क्राइम ब्रांच ने तंत्र-मंत्र के बहाने महिला से 1 करोड़ रुपये ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए आशा यादव, उसके पति हरीश और एक साथी श्यान खान को गिरफ्तार किया है। आशा का भाई मुकेश, जो खुद को तांत्रिक बताता था, फरार है। आरोपियों ने महिला को विश्वास में लेने के लिए 16 माह तक झांसे में रखा और गृहशांति, बेटे को वश में करने तथा रकम दोगुनी करने का लालच दिया। इस ठगी का खुलासा तब हुआ जब 17 लाख रुपये के जेवर खरीदने के लिए दिए गए 10 करोड़ के चेक बाउंस हो गए और सराफा कारोबारी ने महिला के पति को फोन कर दिया। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसने अन्य लोगों को भी ठगा हो सकता है। आरोपियों के वित्तीय लेन-देन और अन्य सदस्यों की पड़ताल की जा रही है, जिससे जल्द कुछ और नामों के सामने आने की उम्मीद है। यह मामला तब सामने आया जब पीड़ित महिला के पति को एक सराफा कारोबारी का फोन आया। महिला ने 17 लाख रुपये के जेवर खरीदने के लिए आरोपियों द्वारा दिए गए 10 करोड़ के एक चेक का भुगतान करने की कोशिश की, लेकिन वह बाउंस हो गया। इस घटना के बाद महिला के पति को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने जांच शुरू की और पाया कि यह एक सुनियोजित रैकेट था। आरोपियों ने महिला को भरोसा दिलाने के लिए 8 चेक, एक खाली चेक और 6 एटीएम कार्ड भी दिए थे। पुलिस के अनुसार, साकेत नगर निवासी पुरुषोत्तम शर्मा और उनकी पत्नी राजेश्वरी का बेटा विवेक उनसे अलग रहता था। राजेश्वरी उसे घर बुलाना चाहती थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात पड़ोसन से हुई, जिसने आशा यादव से परिचय कराया। आशा ने दावा किया कि उसका भाई मुकेश तंत्र-मंत्र के जरिए विवेक को वश में कर घर लौटा सकता है। इसके बाद आशा और मुकेश ने पूजा के नाम पर महिला से 20 हजार रुपये ऐंठे। दोनों ने मिलकर महिला को गृहक्लेश का डर दिखाकर जाल में फंसाया। उन्होंने धीरे-धीरे करके कुल 7.16 लाख रुपये ऑनलाइन, 12.54 लाख रुपये नकद, 625 ग्राम सोना और 500 ग्राम चांदी के जेवर ठग लिए। यह सब 16 माह की अवधि में किया गया। आरोपियों ने ठगी की रकम से खरीदे गए जेवर गोल्ड लोन कंपनियों में गिरवी रख दिए थे।
तांत्रिक भाई ने ठगी का जाल फैलाया
पुलिस ने उनसे पूछताछ की है और उनके ठगी के तरीकों का खुलासा हुआ है। उन्होंने बताया कि वे लोगों को झांसा देकर पैसे और कीमती सामान ऐंठते थे। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने ठगे गए सोने को गोल्ड लोन कंपनियों में गिरवी रखा था। पुलिस ने इन गोल्ड लोन कंपनियों से संपर्क कर जेवर बरामद करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। यह ठगी का एक संगठित रैकेट प्रतीत होता है, जिसके तार अन्य शहरों तक भी फैले हो सकते हैं। पुलिस अन्य पीड़ितों की भी तलाश कर रही है। आरोपियों के वित्तीय लेन-देन और अन्य सदस्यों की पड़ताल जारी है। जल्द ही इस मामले में कुछ और नामों के सामने आने की संभावना है। एडिशनल डीसीपी (क्राइम ब्रांच) शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि गिरोह लोगों को डरा-धमकाकर और लालच देकर ठगी का शिकार बनाता था।

