ग्वालियर में जीवाजी विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के नेतृत्व एवं प्रशिक्षण शिविर के छठे दिन स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कुलगुरु दिवाकर सिंह राजपूत ने युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि विकसित भारत की नींव तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानवीय संवेदना, सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। राजपूत ने युवाओं से विभाजनकारी प्रवृत्तियों से दूर रहकर एकजुट समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा केवल वर्तमान पीढ़ी के नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण के लिए एक विशेष पीढ़ी हैं। सिंह ने एआई के सामाजिक प्रभावों पर भी अपने विचार रखे और युवाओं को इसके सकारात्मक उपयोग के लिए प्रेरित किया, साथ ही मानवीय मूल्यों के संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित किया। कुलगुरु दिवाकर सिंह राजपूत ने रामायण के प्रसंग का स्मरण कराते हुए युवाओं को स्वयं का 'जामवंत' बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जाम्बवंत जी ने हनुमान जी को उनकी छिपी हुई शक्ति का बोध कराया था, उसी प्रकार आज के युवाओं को भी अपनी असीम क्षमताओं को पहचानना होगा और उन्हें राष्ट्र निर्माण में लगाना होगा। उन्होंने 'विकसित' शब्द की प्रेरक व्याख्या करते हुए विमर्श, कर्तव्यपरायणता, सिद्धि और तरंग को विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। राष्ट्रीय सेवा योजना, जीवाजी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक हरिशंकर सिंह कंसाना के निर्देशन में आयोजित इस बौद्धिक सत्र का मंच संचालन प्रो. मुदिता मिश्रा ने किया। कार्यक्रम के दौरान संजय कुमार पांडे, प्रो. हिंदू सिंह धाकड़, नरेंद्र कुमार वर्मा, अर्चना सेन, प्रो. विनोद सिंह कुशवाह, गिरजा नरवरिया, प्रो. दीक्षा त्यागी और प्रो. एच एल। पटेल जैसे कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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कुलगुरु बोले: युवाओं को अपनी क्षमता पहचान स्वयं का 'जामवंत' बनना होगा, मानवीय मूल्यों संग राष्ट्र निर्माण करें
2 अक्टूबर 2026 को 10:57 pm बजे

कुलगुरु बोले: युवाओं को अपनी क्षमता पहचान स्वयं का 'जामवंत' बनना होगा, मानवीय मूल्यों संग राष्ट्र निर्माण करें
