रक्षाबंधन पर विशेष पूजा का आयोजन हुआ
महाकाल को बांधी गई पहली राखी, विशेष राखी से हुआ बाबा का दिव्य श्रृंगार। उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में रक्षाबंधन का पर्व बेहद खास तरीके से मनाया गया। मान्यता के अनुसार, बड़े हिंदू पर्वों की शुरुआत बाबा महाकाल के आंगन से होने की परंपरा है। इस खास मौके के लिए पुजारी परिवार की महिलाओं ने करीब एक सप्ताह तक मेहनत कर अपने हाथों से राखी तैयार की। राखी में भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता को भी स्थान दिया गया। रक्षाबंधन के दिन मंदिर में सुबह से ही विशेष धार्मिक माहौल रहा। भस्म आरती शुरू होने से पहले उन्होंने मंत्रोच्चार किया और पूजा की तैयारियां पूरी कीं। भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। इसके बाद विशेष रूप से तैयार की गई राखी बाबा महाकाल को समर्पित की गई। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तों के बीच भी उत्साह का माहौल दिखाई दिया। बाबा महाकाल को राखी बांधने की यह परंपरा धार्मिक रूप से काफी खास मानी जाती है। भक्तों के लिए भगवान को राखी अर्पित करना भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के भाव को भगवान से जोड़ने का एक सुंदर तरीका है। इस बार भगवान महाकाल के लिए तैयार की गई राखी सामान्य राखियों से काफी अलग थी। करीब एक सप्ताह को बनाने में पुजारी परिवार की महिलाओं ने मेहनत की। राखी को रेशमी कपड़े और रेशमी धागों से तैयार किया गया। इसके साथ ही इसे आकर्षक बनाने के लिए आभूषणों का इस्तेमाल किया गया। राखी में भगवान महाकाल से जुड़े धार्मिक भाव को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग प्रतीकों को शामिल किया गया। पुजारी आकाश गुरु के अनुसार, राखी में भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख को भी जगह दी गई है। इसके अलावा गौ माता का प्रतीक भी राखी में शामिल किया गया। इस तरह राखी को केवल सजावटी वस्तु नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं और आस्था से जोड़कर तैयार किया गया। भगवान महाकाल के लिए राखी तैयार करने वाली पुजारी परिवार की महिलाओं ने इस खास अवसर के लिए पूरे सावन महीने में व्रत और उपवास रखा। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। पूरे महीने पूजा-पाठ और उपवास के बाद महिलाओं ने रक्षाबंधन के लिए राखी तैयार की।

