भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक में सुरक्षा और कनेक्टिविटी के मुद्दे प्रमुख रहेंगे
बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक, दिसंबर 2025 के बाद उनकी पहली मुलाकात होगी। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित की जाएगी, जो 31 अगस्त से 1 सितंबर तक बिश्केक में होगा। इस सम्मेलन में भारत आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद से मुकाबले का मुद्दा प्रमुखता से उठाने की योजना बना रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और एससीओ की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का जश्न मनाएंगे। इस दौरान, वे सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर को भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित करेंगे। प्रधानमंत्री के इस दौरे के दौरान, वे उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा भी करेंगे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में मॉस्को का दौरा किया था, जहां उन्होंने पुतिन के साथ व्यापार एवं निवेश, ऊर्जा और परमाणु सहयोग समेत कई मुद्दों पर चर्चा की थी। इस दौरे के दौरान, पुतिन ने भारत को उर्वरकों की निरंतर आपूर्ति का भरोसा भी दिलाया था। प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक ऐसे समय में होगी, जब सितंबर में भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होना है। इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी शी जिनपिंग की मेजबानी करेंगे। इस दौरान, मोदी और जिनपिंग के बीच भी मुलाकात प्रस्तावित है। भारत 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है, और पाकिस्तान भी इस संगठन का सदस्य है। इस संगठन में आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का जोर महत्वपूर्ण है। आगामी एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में भारत की सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा होने की संभावना है। किर्गिस्तान यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी छठे वर्ल्ड नोमाड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। यह आयोजन मध्य एशिया की पारंपरिक संस्कृति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। एससीओ सम्मेलन से इतर, प्रधानमंत्री की अन्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम भी तैयार किया जा रहा है। इन बैठकों में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही कहा था कि वे सितंबर में बीआरआईसीएस शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन की मेजबानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर को होगा। भारत के इस दौरे का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देना है। भारत आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ एकजुटता को बढ़ाने के लिए एससीओ के मंच का उपयोग करेगा। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूती मिलेगी। भारत हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाता आया है, और एससीओ के माध्यम से वह इस मुद्दे पर अपने दृष्टिकोण को साझा करेगा। पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक में, मोदी और पुतिन के बीच विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बैठक के दौरान, दोनों नेता ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, और निवेश के मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। यह बैठक दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने का एक अवसर है। इस प्रकार, एससीओ शिखर सम्मेलन में मोदी और पुतिन के बीच होने वाली मुलाकात, दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण परिणाम ला सकती है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से भारत और रूस के संबंधों में नई ऊर्जा का संचार होने की उम्मीद है। आगामी शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी, उसकी अपनी विदेश नीति को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।
