प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर बनाई विशेष कार्ययोजना
पटाखों से निकले जहरीले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की योजना, वायु गुणवत्ता नियंत्रण पर जोर
भोपाल शहर की हवा और स्वच्छता व्यवस्था को दीपावली के बाद बिगड़ने से बचाने के लिए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) ने एक बड़ी और समन्वित कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना के तहत, आतिशबाजी से निकलने वाले खतरनाक कचरे को नगर निगम द्वारा सामान्य कचरे से अलग इकट्ठा किया जाएगा। इस विशेष कचरे को गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों से एक अनुबंधित वेस्ट मैनेजमेंट एजेंसी के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से निपटाने के लिए पीथमपुर स्थित ट्रीटमेंट स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी (टीएसडीएफ) भेजा जाएगा। दीपावली के दौरान राजधानी भोपाल में हर साल औसतन 1000 किलोग्राम से अधिक पटाखों का जहरीला कचरा निकलता है, जो वायु प्रदूषण के स्तर को खतरनाक रूप से बढ़ा सकता है। वायु प्रदूषण के स्तर (एक्यूआई) में संभावित बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए, एमपीपीसीबी ने नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है। इस समन्वित प्रयास का मुख्य उद्देश्य शहर की वायु गुणवत्ता को बनाए रखना और नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। गाइडलाइन के अनुसार, पटाखों के कचरे को किसी भी परिस्थिति में खुले में नहीं जलाया जाएगा, जिससे हानिकारक रसायन हवा में फैल सकें। शहर की वायु गुणवत्ता को नियंत्रित रखने के लिए प्रमुख सड़कों और व्यस्त चौराहों पर लगातार स्मॉग गन और फॉगिंग मशीनों से पानी का छिड़काव भी किया जाएगा। शहर की हवा में धूल कणों को सतह पर बैठाने के लिए, सभी प्रमुख वॉटर फाउंटेन को 24 घंटे लगातार चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद करेगा। कचरा संग्रहण की एक त्रि-स्तरीय व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें घर-घर संग्रह, ट्रांसफर स्टेशनों पर अलग भंडारण और विशेष वाहनों द्वारा पीथमपुर तक सुरक्षित परिवहन शामिल है। कचरा गाड़ियों में खतरनाक कचरे के लिए विशेष लाल रंग के बैग और कंपार्टमेंट की व्यवस्था की गई है। पटाखों के कचरे के खतरनाक प्रभाव को देखते हुए यह विशेष व्यवस्था की गई है। पटाखों में स्ट्रोंशियम, बेरियम, सल्फर, कॉपर और लेड जैसे भारी तत्व होते हैं। जब इस कचरे को सामान्य कचरे में फेंक दिया जाता है, तो ये रसायन जमीन और भूजल में घुलकर उसे जहरीला बना देते हैं, जिससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। इसके अतिरिक्त, अधजले पटाखों से डंपिंग यार्ड या कचरा गाड़ियों में आग लगने का भी जोखिम बना रहता है। पर्यावरण, स्वास्थ्य और निगम की रणनीति के तहत, दीपावली की रात शहर का एक्यूआई अक्सर 'खराब' श्रेणी में पहुंच जाता है। इसे नियंत्रित करने के लिए फाउंटेन चलाने और फॉगिंग करने जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे सूक्ष्म कणों का असर कम हो सके।

