मध्य प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार और शराब माफिया के बढ़ते दुस्साहस पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। प्रदेश में अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच देवास जिले में शराब तस्करी रोकने पहुंचे एक पुलिस अधिकारी की मौत ने इस चुनौती की गंभीरता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की शराब से भरे ट्रक की चपेट में आने से हुई मौत ने पुलिस और प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा किया है। घटना के बाद मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया है कि कानून से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगी और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए पुलिस अधिकारी को श्रद्धांजलि दी और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार शोकाकुल परिवार के साथ खड़ी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने दिवंगत थाना प्रभारी के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने तथा उनकी पत्नी को अनुकंपा के आधार पर उपनिरीक्षक के पद पर नौकरी देने की घोषणा भी की है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध शराब के खिलाफ सरकार की सख्ती के पीछे प्रदेश में हाल के महीनों में सामने आए गंभीर मामले भी हैं। सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। इस मामले में कई लोगों की जान चली गई थी। घटना सामने आते ही मुख्यमंत्री ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए थे। आबकारी और पुलिस विभाग के अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई हुई। मुख्यमंत्री ने सागर पहुंचकर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की तथा पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अवैध शराब का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर अपराध है। इस कारोबार को संरक्षण देने वाले, इसमें शामिल होने वाले और अपनी जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही बरतने वाले किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा। सरकार ने सीमावर्ती राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। दूसरी ओर, देवास की घटना के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि शराब माफिया के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं और सरकार के दावों के बावजूद अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। विपक्ष का कहना है कि जब कानून लागू कराने वाले पुलिस अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम नागरिकों की सुरक्षा का सवाल और गंभीर हो जाता है। कांग्रेस ने शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कराने और इसके पीछे मौजूद प्रभावशाली लोगों की भूमिका उजागर करने की मांग की है। मध्य प्रदेश में शराब माफिया के खिलाफ सरकार की चुनौती अब केवल छापेमारी और गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है। अवैध शराब के उत्पादन केंद्रों, परिवहन के रास्तों, वितरण नेटवर्क और संभावित संरक्षण तंत्र को तोड़ना सबसे बड़ी जरूरत है। साथ ही पुलिस और आबकारी विभाग की जवाबदेही तय करना भी जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सख्ती और विपक्ष के सवालों के बीच अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि कार्रवाई का असर जमीन पर कितना दिखाई देता है। शराब माफिया के आर्थिक और आपराधिक नेटवर्क को तोड़कर ही सरकार अपने संकल्प को परिणाम में बदल सकेगी। फिलहाल मुख्यमंत्री के दो टूक संदेश ने यह साफ कर दिया है कि अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
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मोहन सरकार का शराब माफिया पर शिकंजा
2 नवंबर 2026 को 10:51 pm बजे
