उज्जैन में एकीकृत तीर्थ सर्किट का विकास शुरू हो रहा है। महाकाल दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को अब शहर के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में आसानी होगी। इस परियोजना के तहत शहर के मंदिरों को एकीकृत तीर्थ-पर्यटन नेटवर्क में जोड़ा जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं की यात्रा को सरल और सुविधाजनक बनाया जा सकेगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहर में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। योजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं के ठहराव की अवधि बढ़ाने और धार्मिक स्थलों के विकास को ध्यान में रखा गया है। इसके लिए कमर्शियल स्पेस, पार्किंग और अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके। अर्बन चैलेंज फंड के तहत 281.13 करोड़ रुपये के इंटीग्रेटेड टेम्पल इकोसिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरी मिल चुकी है। यह परियोजना केवल सरकारी खर्च पर आधारित नहीं होगी, बल्कि रेवेन्यू जनरेटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मॉडल से भी जुड़ी होगी। इस एकीकृत योजना में कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही शिप्रा रिवरफ्रंट को भी धार्मिक पर्यटन के इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को घाट और नदी किनारे का अनुभव भी मिल सकेगा। इस परियोजना में 8 से 151 फीट ऊँची विराट स्वरूप प्रतिमा को भी शामिल किया गया है, जो सिंगापुर के यूनिटी माल के पीछे शिप्रा तट पर स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा इस धार्मिक-पर्यटन नेटवर्क का एक नया आकर्षण बनकर उभर सकती है। योजना के तहत पार्किंग और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इससे श्रद्धालुओं को वाहन खड़े करने, पूजा सामग्री लेने और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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उज्जैन का धार्मिक पर्यटन नेटवर्क
30 अगस्त 2026 को 11:27 pm बजे

उज्जैन का धार्मिक पर्यटन नेटवर्क
