100 एकड़ में बन रही मंडी में होंगी आधुनिक सुविधाएं
अधिकारियों की लापरवाही से अटका था निर्माण कार्य
वर्तमान मंडी का स्थान, जो कन्नौद रोड पर है, सीमित जगह और सुविधाओं के कारण किसानों के लिए असुविधाजनक साबित हो रहा है। नई मंडी का विशाल परिसर इस समस्या का समाधान करेगा। नई मंडी में किसानों को अपनी उपज के भंडारण और बिक्री के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इससे उनकी मेहनत का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। व्यापारियों के लिए डुप्लेक्स गोडाउन में अंडरग्राउंड बिजली, पेमेंट काउंटर, अलग वॉशरूम और ड्रेनेज सिस्टम जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि व्यापारिक गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकें। इस मंडी को 2019 में मंजूरी मिली थी, लेकिन 2022 तक पूरा होने की समय-सीमा पूरी नहीं हो सकी। अधिकारियों की लापरवाही को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। सचिव नरेंद्र कुमार मेश्राम ने अब सक्रियता दिखाते हुए निर्माण कार्य को फिर से शुरू करवाया है।
आष्टा की नई कृषि उपज मंडी का निर्माण कार्य, जिसे 2019 में मंजूरी मिली थी और 2022 तक पूरा होना था, अब जाकर गति पकड़ रहा है। भोपाल-इंदौर हाईवे के पास हमीदखेड़ी पहाड़ी पर 100 एकड़ में बन रही इस मंडी में दो ऊंचे टॉवर और दो बड़े तौल कांटे जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल की गई हैं। यह परियोजना अधिकारियों की लापरवाही के कारण अटकी हुई थी, लेकिन अब सचिव नरेंद्र कुमार मेश्राम ने कार्य को फिर से शुरू करवाया है। यह नई मंडी आष्टा की वर्तमान मंडी की जगह लेगी, जो कन्नौद रोड पर स्थित है। वर्तमान मंडी पर 8 जिलों की 14 तहसीलों के किसान निर्भर हैं, और नई मंडी के निर्माण से किसानों और व्यापारियों को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने भी मंडी सचिव को जल्द निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि परियोजना समय पर पूरी हो। नई मंडी में व्यापारियों के लिए खास सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है। उनके गोदामों में अंडरग्राउंड बिजली, पेमेंट काउंटर, अलग वॉशरूम और ड्रेनेज सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। हालांकि, व्यापारियों के डुप्लेक्स गोडाउन अभी तक नहीं बने हैं, और उनके बनने के बाद ही मंडी शिफ्टिंग की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो मंडी की कार्यक्षमता और व्यावहारिकता को बढ़ाएगा। इस परियोजना की शुरुआत 2019 में हुई थी और इसे 2022 तक पूरा किया जाना था। लेकिन विभिन्न कारणों से, विशेषकर अधिकारियों की कथित लापरवाही के चलते, निर्माण कार्य में देरी हुई। सचिव नरेंद्र विश्राम ने पहले बताया था कि नई कृषि मंडी में शेष बचे हुए निर्माण कार्य चल रहे हैं और इसमें कम से कम एक साल और लगेगा। फिर भी, उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में किसानों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। वर्तमान में, मंडी में एक टीन शेड का निर्माण हो चुका है और मंडी कार्यालय भी तैयार है। हालांकि, व्यापारियों के लिए आवश्यक गोदामों का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। इन गोदामों में अंडरग्राउंड बिजली, पेमेंट काउंटर, अलग वॉशरूम और ड्रेनेज सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल की जा रही हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि व्यापारियों को भी काम करने के लिए एक बेहतर और सुव्यवस्थित वातावरण मिले। नई मंडी के बनने से वर्तमान मंडी में होने वाली भीड़ कम होगी। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए एक बेहतर और सुरक्षित जगह मिलेगी, जिससे उनकी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। हालांकि, व्यापारियों के मनसा अनुरूप सभी काम पूरे होने तक मंडी शिफ्टिंग संभव नहीं है। व्यापारियों के गोदामों का निर्माण पूरा होने के बाद ही नई मंडी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यह एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें कई हितधारकों की आवश्यकताओं का ध्यान रखना पड़ता है। सचिव नरेंद्र कुमार मेश्राम ने कार्य को फिर से शुरू कराकर परियोजना को गति देने का प्रयास किया है। उनके प्रयासों से अटके हुए निर्माण कार्य अब आगे बढ़ रहे हैं। यह कदम उन किसानों और व्यापारियों के लिए राहत भरा है जो नई मंडी की सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। नई कृषि मंडी में दो ऊंचे टॉवर भी बनाए जाएंगे, जो मंडी के सौंदर्य और कार्यक्षमता दोनों को बढ़ाएंगे। इन टॉवरों के साथ-साथ दो बड़े तौल कांटे भी स्थापित किए जाएंगे। इन सुविधाओं का उद्देश्य किसानों और व्यापारियों के लिए प्रक्रिया को सुचारू और कुशल बनाना है। विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने मंडी सचिव को जल्द निर्माण पूरा करने के निर्देश देकर परियोजना को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि यह मंडी क्षेत्र के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं होगी। नई मंडी के निर्माण में अभी कम से कम 1 वर्ष लगने की संभावना है, जैसा कि सचिव नरेंद्र विश्राम ने पहले संकेत दिया था। यह देरी परियोजना की शुरुआत में हुई बाधाओं का परिणाम है। हालांकि, कार्य फिर से शुरू होने से उम्मीद जगी है कि यह जल्द ही पूरा हो जाएगा। इस नई मंडी के बनने से आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी। यह क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
