पटना जिले के पानातलाव का रहने वाला युवराज कुमार शर्मा एक समय आईआईटी में जाने का सपना देखता था। लेकिन इस सपने ने उसे ठग बनने की राह पर डाल दिया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद युवराज को नौकरी नहीं मिली, फिर उसने कोचिंग सेंटर खोला। यह कोचिंग सेंटर उसे अच्छी कमाई कराने में मदद कर रहा था। लेकिन कुछ साल बाद युवराज ने देखा कि वह दूसरों को आईआईटी में एडमिशन दिलाने का सपना दिखाकर पैसे कमा सकता है। युवराज ने एडमिशन के लिए फर्जी कॉल सेंटर बनाए और सोशल मीडिया के जरिए पेरेंट्स और स्टूडेंट्स को तलाशा। उसने इंस्टाग्राम पर ‘तेचोर्बित्1111’ नाम का अकाउंट बनाया और छात्रों को बड़े कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का भरोसा दिया। इस तरह से उसने एक बड़ा एडमिशन रैकेट खड़ा कर लिया। पुलिस ने युवराज के ठगी के मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि युवराज और उसके साथी कॉलेज प्रशासन से जुड़े व्यक्तियों का रूप धारण कर छात्रों और उनके माता-पिता से पैसे वसूलते थे। पुलिस का आरोप है कि इसी सपने के नाम पर उसने कई लोगों से पैसे लिए। पुलिस ने दो फर्जी कॉल सेंटरों पर छापेमारी की। इन छापेमारी में पुलिस ने पांच मोबाइल फोन की डिजिटल जानकारी खंगाली और कई सबूत बरामद किए। छापेमारी में यह भी पता चला कि युवराज ने 2019 में एडमिशन कंसल्टेंसी खोली थी। इस कंसल्टेंसी के जरिए वह छात्रों को मैनेजमेंट कोटे से एडमिशन दिलाने का काम करता था। युवराज ने कई बार एडमिशन की प्रक्रिया के दौरान पैसे लेकर छात्रों को धोखा दिया। कई माता-पिता ने पुलिस से शिकायत की कि उन्हें एडमिशन नहीं मिला, जबकि उन्होंने पैसे पहले ही दे दिए थे। एक महिला ने पुलिस को बताया कि उसने युवराज को 16.5 लाख रुपये दिए थे, लेकिन उसके बेटे का एडमिशन नहीं हुआ। पुलिस ने बैंक से संपर्क कर 16 लाख रुपये फ्रीज करा दिए। इसके बाद पुलिस ने मामले में गंभीरता दिखाई और युवराज के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क 2019 से चल रहा था और कई लोग इससे प्रभावित हुए हैं। युवराज ने जब अपने ठगी के तरीके से पैसे कमाने शुरू किए, तो उसने अपने पुराने सपने को भुला दिया। वह अब खुद आईआईटी जाने की बजाय दूसरों को वहां भेजने का सपना दिखाने लगा। यह सब तब हुआ जब उसे खुद आईआईटी में सफलता नहीं मिली। पुलिस ने युवराज की गिरफ्तारी के बाद उसके साथियों के बारे में भी जानकारी जुटाई। जांच में पता चला कि उसके पास कई लोग थे जो उसके इस रैकेट में शामिल थे। पुलिस ने बताया कि युवराज के पास से कई फर्जी दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद पूरी रकम वापस कर दी। इस मामले में कई बार कॉलेज प्रशासन से जुड़े व्यक्तियों से भी मुलाकात की गई। लेकिन युवराज के ठगी के तरीके को समझना पुलिस के लिए आसान नहीं था। युवराज ने अपने रैकेट के जरिए कई छात्रों से पैसे लिए। लेकिन जब एडमिशन लिस्ट आने से पहले पूरा नेटवर्क गायब हो जाता था, तब छात्रों और उनके माता-पिता को ठगी का अहसास होता था। सात लोगों ने पुलिस से संपर्क कर बताया कि उन्हें पैसे देने के बावजूद एडमिशन नहीं मिला। इस मामले में पुलिस ने युवराज के अलावा अन्य लोगों की भी जांच शुरू की है। युवराज का सपना आईआईटी में जाने का था, लेकिन अब वह खुद उस सपने को दूसरों के लिए ठगी का हथियार बना चुका है। पुलिस का कहना है कि युवराज ने अपने सपने को भूलकर दूसरों को ठगने का काम शुरू किया। पुलिस ने युवराज के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया है। अब इस मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य आरोपियों को पकड़ने की कोशिश कर रही है। इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ, जब एक महिला ने पुलिस से ठगी की शिकायत की।
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युवराज कुमार शर्मा ने बनाया एडमिशन ठगी का रैकेट
30 अगस्त 2026 को 11:27 pm बजे

युवराज कुमार शर्मा ने बनाया एडमिशन ठगी का रैकेट
