प्रसन्नजीत की पहचान के बाद भारत लौटने की प्रक्रिया शुरू हुई
बालाघाट का निवासी प्रसन्नजीत, कई वर्षों तक पाकिस्तान की जेल में बंद रहा। भारत सरकार की पहल के बाद उसकी पहचान और भारत लौटने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। प्रसन्नजीत को पाकिस्तान की जेल से रिहा किया गया और वह अपने परिवार के पास वापस लौट आया। संघमित्रा, प्रसन्नजीत की बहन, ने अपने भाई को वापस लाने के लिए कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा, "सब उसे मरा हुआ मानते थे, लेकिन मैंने हमेशा भरोसा रखा कि मेरा भाई जिंदा है। " कई सालों तक प्रसन्नजीत की कोई खबर नहीं थी। पाकिस्तान की जेल में बंद रहते हुए प्रसन्नजीत की मानसिक स्थिति भी बिगड़ गई थी। परिवार को यह भी नहीं पता था कि प्रसन्नजीत पाकिस्तान कैसे पहुंचा। 2018 में घर छोड़ने के बाद से उसकी कोई जानकारी नहीं थी। जब पाकिस्तान रेंजर्स ने हाल ही में प्रसन्नजीत को भारत की सीमा पर छोड़ा, तब संघमित्रा ने खुद पंजाब जाकर उसे लेने का निर्णय लिया। यह वह दिन था जिसका उसने लंबे समय से इंतजार किया था। संघमित्रा ने बताया कि फोन आने के बाद उन्हें विश्वास हो गया कि उनका भाई जिंदा है। जम्मू के कठुआ निवासी कुलदीप ने बताया कि वह भी कोट लखपत जेल में बंद थे और वहां से रिहा होने के बाद उन्होंने प्रसन्नजीत के बारे में जानकारी दी। कुलदीप ने बताया कि प्रसन्नजीत का नाम पाकिस्तान की जेल में सुनील कुमार के तौर पर दर्ज था। इस जानकारी ने संघमित्रा को और भी अधिक प्रेरित किया और वह अपने भाई को वापस लाने के प्रयासों में जुट गईं। संघमित्रा ने हार नहीं मानी और उन्होंने भारत सरकार से प्रसन्नजीत के भारतीय नागरिक होने से जुड़े दस्तावेज़ मांगे। इस प्रक्रिया में कई कानूनी उलझनें आईं, लेकिन संघमित्रा ने संघर्ष जारी रखा। प्रसन्नजीत अब बालाघाट में अपनी बहन के पास रह रहा है। वह फार्मेसी का ग्रेजुएट है और अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अब अपने जीवन को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है। संघमित्रा ने अपने भाई के लौटने पर खुशी जताई और कहा कि अब उनकी मां की देखभाल करना उनकी जिम्मेदारी है। प्रसन्नजीत की मां बीमार हैं और संघमित्रा अपने भाई की देखभाल कर रही हैं। प्रसन्नजीत ने कहा कि उसे बस इतना याद है कि पाकिस्तान की जेल से घर की जिंदगी बहुत अच्छी है। वह अपने अतीत को याद करने की कोशिश करता है लेकिन उसे ज्यादा याद नहीं आता।
