पूर्व मंत्री पीसी शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है। उनकी ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया है। यह याचिका उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर की थी, जिसने कांग्रेस के पूर्व विधायक पीसी शर्मा की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट से भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने 2 नवंबर को इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पीठ ने आदेश में स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता, इसी कारण विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है। कोर्ट ने लंबित आवेदनों को भी निपटा दिया। पीसी शर्मा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 2 अप्रैल 2025 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उनकी चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इसमें भ्रष्ट आचरण के विशिष्ट आरोप नहीं लगाए गए हैं। शर्मा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पैरवी की, जबकि भगवानदास सबनानी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने अपना पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद विधायक भगवानदास सबनानी ने भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने कांग्रेस और पीसी शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले वे जनता से चुनाव हारे, फिर हाईकोर्ट से और अब सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली। सबनानी ने आरोप लगाया कि एक बार फिर कांग्रेस का झूठ कोर्ट ने उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईवीएम पर सवाल उठाना कांग्रेस और उसके नेताओं का काम बन गया है। सबनानी ने कहा कि जनता के जनमत का मजाक उड़ाने वालों के खिलाफ वे विधि विशेषज्ञों से राय लेकर कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने चुने हुए जनप्रतिनिधियों और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। कोर्ट के फैसले ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है, यह स्पष्ट हो गया है कि किसने सच का साथ दिया। यह मामला दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट पर हुए चुनाव से जुड़ा है, जिसके परिणाम 3 दिसंबर 2023 को घोषित हुए थे। इस चुनाव में भाजपा के भगवानदास सबनानी को 76,689 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के पीसी शर्मा को 60,856 वोट प्राप्त हुए थे। सबनानी ने यह चुनाव 15,833 वोटों के भारी अंतर से जीता था। चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए पीसी शर्मा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव याचिका क्रमांक 15/2024 दायर की थी। उन्होंने अपनी याचिका में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया था कि राज्य तंत्र की मिलीभगत से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में हेरफेर किया गया है। शर्मा ने मतगणना के समय ईवीएम की बैटरी के स्तर को गड़बड़ी का आधार बनाया था। शर्मा का कहना था कि अधिकांश ईवीएम मशीनों में बैटरी 99 प्रतिशत चार्ज दिखाई दे रही थी, जबकि कुछ मशीनों में यह 80 प्रतिशत से भी कम थी। उन्होंने इसी आधार पर चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे और इसे चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का एक माध्यम बताया था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2025 को तत्कालीन जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ के समक्ष इस चुनाव याचिका पर सुनवाई की थी। हाईकोर्ट ने याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इसमें किसी व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्ट आचरण का विशिष्ट आरोप नहीं लगाया गया है, जिसे ईवीएम तक पहुंच हो। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया था कि निर्वाचित प्रत्याशी के साथ मिलकर राज्य तंत्र ने क्या किया और कथित गड़बड़ी से चुनाव परिणाम किस तरह से प्रभावित हुआ। कोर्ट ने माना कि याचिका में लगाए गए आरोप सामान्य प्रकृति के हैं और इनमें भ्रष्ट आचरण के आवश्यक विवरण मौजूद नहीं हैं। कोर्ट ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 81, 83 और 100 को एक साथ पढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया था। भगवानदास सबनानी की ओर से सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 के नियम 11 के तहत एक आवेदन दिया गया था, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में पीसी शर्मा की ओर से दलील दी गई थी कि हाईकोर्ट ने इस मामले में अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण अपनाया है। उनकी याचिका में विचारणीय प्रश्न थे और मतगणना के सीसीटीवी फुटेज के जरिए विचारण के दौरान आवश्यक तथ्यों को साबित किया जा सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निर्वाचन अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया था। सबनानी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जवाब देते हुए कहा गया कि चुनाव याचिका में आवश्यक तात्विक तथ्य ही नहीं दिए गए थे। उन्होंने तर्क दिया कि करीब 235 मतदान केंद्रों वाले क्षेत्र में किसी विशिष्ट मतदान केंद्र, ईवीएम, व्यक्ति, तारीख, स्थान या कथित छेड़छाड़ के तरीके का कोई उल्लेख नहीं था। सबनानी के वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में यह भी नहीं बताया गया था कि 15,833 वोटों के भारी अंतर से तय हुए परिणाम किस तरह से प्रभावित हुए। इस फैसले के साथ ही दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट से भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी का निर्वाचन वैध ठहराया गया है।
समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की पीसी शर्मा की याचिका, हाईकोर्ट के फैसले में नहीं किया हस्तक्षेप
2 नवंबर 2026 को 10:51 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की पीसी शर्मा की याचिका, हाईकोर्ट के फैसले में नहीं किया हस्तक्षेप
साझा करेंWhatsApp
