बड़े तालाब को रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है, लेकिन वेटलैंड संरक्षण नियम-2017 के तहत अब तक इसे अधिसूचित नहीं किया गया है। प्रदेश के अन्य जल निकायों की भी यही स्थिति बनी हुई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इस मामले में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिवों को 3 महीने के भीतर वेटलैंड की ड्राफ्ट अधिसूचना तैयार कर प्रगति रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। 29 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया था। इन निर्देशों के तहत 2.25 हेक्टेयर से बड़े जल निकायों को भी अधिसूचना की प्रक्रिया में शामिल किया जाना अनिवार्य है। भोपाल जिले में लगभग 150 और पूरे प्रदेश में 3000 से अधिक जल निकाय हैं। एनजीटी में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार, कलियासोत और केरवा जलाशयों का तकनीकी सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। एनजीटी के निर्देशों का पालन न होने पर जल निकायों के संरक्षण में बाधा आ सकती है। यह स्थिति प्रदेश के महत्वपूर्ण जल स्रोतों के प्रबंधन के लिए चिंता का विषय है।
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एनजीटी ने वेटलैंड अधिसूचना के लिए मुख्य सचिवों से मांगी रिपोर्ट
2 नवंबर 2026 को 10:51 pm बजे
