खेतों में नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण और मिट्टी की उर्वरता पर असर, अब लगेगा जुर्माना
फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी बालागुरु ने एक प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत उल्लंघन करने वालों पर 2500 रुपये से लेकर 15000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के अंतर्गत जारी किया गया है और 2 नवंबर से लागू हो गया है। आदेश में कहा गया है कि जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य फसलों की कटाई के बाद खेतों में खड़ी नरवाई को जलाया नहीं जा सकता। नरवाई जलाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव भी नष्ट हो जाते हैं। इससे भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है और पर्यावरण, जनसंपत्ति तथा प्राकृतिक वनस्पति को भी नुकसान पहुंचता है। खेतों में आग लगने से आसपास के खेतों, संपत्तियों और बिजली की लाइनों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी रहती है, जिससे आग फैल सकती है। किसानों के लिए नरवाई हटाने के वैकल्पिक साधन उपलब्ध हैं, इसलिए फसल अवशेषों को जलाने से बचना आवश्यक है। जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों पर भूमि के रकबे के आधार पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जाएगा। 2 एकड़ से कम भूमि वाले लघु किसानों पर 2500 रुपये का जुर्माना होगा। वहीं, 2 से 5 एकड़ से कम भूमि वाले सीमांत किसानों पर 5000 रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया है। 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों पर प्रति घटना 15000 रुपये का मुआवजा देना होगा। यह आदेश जारी होने की तिथि से आगामी एक माह तक प्रभावशील रहेगा और सीहोर जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में लागू होगा।
