सागर में मां महाकाली मठ परिसर में कजलियों पर सैरा नृत्य का आयोजन किया गया। लक्ष्मण लोधी ने बताया कि यह आयोजन हर साल होता है और इसमें शामिल होकर लोग खुशी मनाते हैं। इस बार भी सागर के नगर और आसपास के अंचलों से चार मंडलियों ने सैरा नृत्य की प्रस्तुति दी। मृदंग की थाप पर नृत्य करते लोग एक दूसरे के साथ मिलकर आनंदित होते हैं। महाकाली मठ मंदिर के पुजारी विजय तिवारी ने जानकारी दी कि महाकाली मठ करीब 90 साल से अधिक पुराना है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 1978 में किया गया था। कजलिया माता के मंदिर में भेंट करने का यह पर्व सागर के लिए विशेष महत्व रखता है। बुंदेलखंड के प्रसिद्ध परंपरागत लोक नृत्य सैरा की परंपरा द्वापर काल से चली आ रही है। तिलक वार्ड निवासी 90 वर्षीय राजाराम पटेल ने बताया कि उनके पूर्वज भी इस कला में पारंगत थे। इस नृत्य के माध्यम से लोग भाईचारे का संदेश देते हैं। महाकाली भजन समिति के तत्वावधान में यहां विशेष पूजा अर्चना और महाआरती के साथ धार्मिक भजन कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां भी हुईं। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में लोगों की भीड़ मंदिर परिसर में जमा हुई। लोग उत्साह से नृत्य करते हुए एक-दूसरे के साथ मिलकर पर्व का आनंद लेते हैं। सैरा नृत्य के माध्यम से लोग एक दूसरे के निकट आते हैं और भाईचारे का संदेश फैलाते हैं। दौलत लोधी ने बताया कि कजलियों का पर्व सैरा नृत्य से लोगों में समरसता बढ़ाता है। इस नृत्य में शामिल होना सागरवासियों के लिए गर्व की बात है।
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सागर में सैरा नृत्य ने भाईचारे का संदेश दिया
30 अगस्त 2026 को 11:27 pm बजे

सागर में सैरा नृत्य ने भाईचारे का संदेश दिया
