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कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों को कार्य संस्कृति का महत्व समझाया। उन्होंने 'दीपक' का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार दीपक में तेल, बाती और लौ के आपसी तालमेल के बिना अंधकार दूर नहीं किया जा सकता, उसी तरह प्रशासनिक कार्यों में भी बेहतर समन्वय और जनहित की भावना अनिवार्य है। बैठक में उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कलेक्टर यादव ने कहा कि प्रशासन के पास पद, प्रतिष्ठा, योग्यता और ज्ञान सब कुछ होता है, परंतु जब तक इन सबका उपयोग समाज और आमजन की भलाई के लिए न किया जाए, तब तक हर प्रयास अधूरा रहता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल योजनाओं का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके क्रियान्वयन में आपसी तालमेल और जन-कल्याण का स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों को कार्य संस्कृति का पाठ पढ़ाते हुए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने एक बेहद प्रेरणादायक और सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन के पास पद, प्रतिष्ठा, योग्यता और ज्ञान सब कुछ है, लेकिन जब तक इन सबका उपयोग समाज और आमजन की भलाई के लिए न किया जाए, तब तक हर प्रयास अधूरा रहता है। कलेक्टर यादव ने स्पष्ट किया कि केवल योजनाओं का होना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके क्रियान्वयन में आपसी तालमेल और जन-कल्याण का स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए। इससे आम जनता तक शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुँच सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रशासन के पास पद, प्रतिष्ठा, योग्यता और ज्ञान सब कुछ है, लेकिन जब तक इन सबका उपयोग समाज और आमजन की भलाई के लिए न किया जाए, तब तक हर प्रयास अधूरा रहता है। बैठक के अंत में, कलेक्टर यादव ने अधिकारियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें एक मूल मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी सकारात्मक सोच के साथ कार्य करें, अच्छा बोलें, अच्छा सोचें और पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ते रहें। इस अनूठी और प्रेरणाप्रद सीख पर बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों ने करतल ध्वनि के साथ अपनी सहमति व्यक्त की।
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