श्रद्धालुओं के लिए प्रतिमाएं तैयार हो रही हैं
इस बार अष्टमी तिथि पर महालक्ष्मी की पूजा का विशेष आयोजन होगा। छठी और सातवीं तिथि एक साथ पड़ने के कारण महालक्ष्मी पूजन का दिन अष्टमी पर आ रहा है। इस अवसर पर घरों में मिट्टी के हाथी बनाकर उनकी विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। इसी के चलते नगर में महालक्ष्मी पूजन के साथ हाथी पूजन की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। श्रद्धालु पूजन के लिए पारंपरिक तरीके से तैयार किए गए हाथी की प्रतिमाएं अपने घरों में ले जाएंगे। कलाकार प्रांशुल प्रजापति इन दिनों पूरी तन्मयता से मिट्टी की मूर्तियां बनाने में जुटे हुए हैं। वे पारंपरिक तरीके से हाथी तैयार कर रहे हैं, जिन्हें पूजन के लिए श्रद्धालु अपने घरों में ले जाएंगे। इन मूर्तियों को बनाने की प्रक्रिया में खास तरह की मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे खास तौर पर तैयार किया जाता है। यह मिट्टी मूर्तियों को टिकाऊ और सुंदर बनाती है। महालक्ष्मी पूजन को लेकर महिलाओं और परिवारों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। वे इस पर्व की तैयारियों में बढ़- चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। घरों की साफ- सफाई से लेकर पूजन सामग्री की खरीदारी तक, सब जोर-शोर से चल रहा है। विशेष रूप से हाथी पूजन की तैयारी को लेकर बच्चों में भी काफी उत्सुकता है। वे अपने हाथों से मिट्टी के हाथी बनाना सीख रहे हैं और उन्हें सजा रहे हैं। कलाकार प्रांशुल प्रजापति ने बताया कि महालक्ष्मी पूजन के लिए हाथी बनाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। उनकी टीम दिन-रात काम कर रही है ताकि समय पर सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रतिमाएं तैयार हो सकें। उन्होंने बताया कि इस बार विशेष मांग के कारण उन्होंने पिछले साल की तुलना में अधिक संख्या में हाथी बनाए हैं। हर हाथी को बारीकी से तराशा गया है और उसे आकर्षक रूप दिया गया है। हाथी पूजन की परंपरा का मुख्य उद्देश्य धन-धान्य और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करना है। मान्यता है कि हाथी समृद्धि और ऐश्वर्य का प्रतीक होता है। इसलिए, अष्टमी तिथि पर महालक्ष्मी की पूजा के साथ मिट्टी के हाथी की पूजा करने से घर में सुख- समृद्धि का वास होता है।

