महिलाओं ने सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर आवाजाही के मुद्दे पर भोपाल में मार्च निकाला
भोपाल में शुक्रवार शाम महिलाओं ने सुरक्षा और सार्वजनिक जगहों पर अपनी आवाजाही के मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरकर पैदल मार्च निकाला। कमला पार्क से शुरू हुआ यह मार्च गैमन मॉल तक पहुंचा। हाथों में तख्तियां और पोस्टर लिए महिलाएं रास्तेभर नारे लगाती रहीं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनके आने- जाने पर बंदिशें लगाने के बजाय शहर में ऐसा सुरक्षित माहौल बनाया जाना चाहिए, जिसमें महिलाएं बिना डर के कहीं भी आ-जा सकें। उन्होंने दिल्ली और जयपुर में हो रहे महिला सुरक्षा से जुड़े प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया। प्रदर्शन में शामिल विदुषी ने कहा कि महिलाओं से यह कहना कि वे शाम 6 या 6 बजे के बाद पार्क न जाएं, समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा, “आप होते कौन हो हमारे ऊपर बंदिशें लगाने वाले कि तुम पार्क नहीं जाओगी, तुम इधर नहीं जाओगी, तुम ये नहीं पहनोगी, वो नहीं करोगी। अगर कुछ करना है तो लड़कों की सोच बदलो। ” उनका कहना था कि महिलाओं को यह बताने के बजाय कि वे कब और कहां जाएं, लड़कों को महिलाओं का सम्मान करना सिखाया जाना चाहिए। एक प्रदर्शनकारी तृप्ति ने ‘फॉल ऑफ पेट्रियार्की’ यानी पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ संदेश देने वाला पोस्टर तैयार किया था। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ स्त्री-विरोधी सोच और व्यवहार का विरोध करना है। उनकी मांग किसी एक पुरुष से नहीं, बल्कि पूरी सोसाइटी से है। उनका कहना था कि कई जगह रात में महिलाओं और बेटियों का निकलना असुरक्षित महसूस होता है। महिलाओं ने शहर के अंधेरे और सुनसान इलाकों में स्ट्रीट लाइट लगाने की जरूरत भी बताई। प्रदर्शनकारियों ने गर्ल्स कॉलेजों के बाहर पिंक बूथ बनाने, नियमित पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने और जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं, वहां कैमरे लगाने की मांग की।

