उज्जैन के आदिवासी कन्या महाविद्यालयीन छात्रावास की 50 छात्राओं ने सोमवार दोपहर कलेक्ट्रेट पहुंचकर बाहरी व्यक्ति सोनू कुशवाहा के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है। छात्राओं का आरोप है कि वह अनधिकृत रूप से परिसर में आता है, अभद्रता करता है और वीडियो रिकॉर्डिंग कराता है। उन्होंने सीसीटीवी कैमरे हटवाने की आशंका भी जताई है
उज्जैन के आदिवासी कन्या महाविद्यालयीन छात्रावास की 50 छात्राओं ने सोमवार दोपहर करीब 3 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचकर एक बाहरी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्राओं का कहना है कि सोनू कुशवाहा नाम का व्यक्ति छात्रावास परिसर में अनधिकृत रूप से आता है, छात्राओं और अधीक्षिका से अभद्रता करता है, और उनकी गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि सीसीटीवी कैमरे बंद करवाए जा सकते हैं। छात्राओं ने स्पष्ट किया कि वे किसी के निजी जीवन पर सवाल नहीं उठा रहीं, लेकिन छात्रावास में उनके आने और छात्राओं के मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार स्पष्ट होना चाहिए। उनका कहना है कि सोनू कुशवाहा का छात्रावास की व्यवस्थाओं से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है, फिर भी वह बार-बार परिसर में आता है। छात्राओं ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में बताया कि सोनू कुशवाहा लगभग हर दूसरे-तीसरे दिन छात्रावास आते हैं। कई बार रात 8 से 9 बजे के बीच भी उनकी आवाजाही देखी गई है। छात्रा किरण सूर्यवंशी ने बताया कि संबंधित व्यक्ति ने 4-5 छात्राओं से बदतमीजी की है। इतना ही नहीं, वार्डन से भी तू-तड़ाक में बात करते हुए कहा कि 'तू होती कौन है बोलने वाली'। यह घटनाक्रम छात्रावास की सुरक्षा और छात्राओं के मन में भय का माहौल पैदा कर रहा है। छात्रावास की अधीक्षिका प्रीति चंदेल ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि सोनू कुशवाहा आदिम जाति कल्याण विभाग के संभागीय उपायुक्त के वाहन चालक हैं। उनका छात्रावास से कोई भी आधिकारिक संबंध नहीं है। इसके बावजूद, वे दिन में 4 से 5 बार छात्रावास परिसर में आते हैं। रात में भी उनका आना-जाना बना रहता है। अधीक्षिका के अनुसार, वे छात्रावास की अधीक्षिका पवित्रा परमार से मिलने आते हैं और कई बार उनके निवास के साथ छात्रावास परिसर में भी पहुंचते हैं। प्रीति चंदेल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में 8 अक्टूबर को जिला संयोजक और संभागीय उपायुक्त को शिकायत देकर अवगत कराया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस स्थिति से छात्राओं की पढ़ाई और छात्रावास की शासकीय व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बाहरी व्यक्ति का बार-बार आना-जाना और हस्तक्षेप छात्राओं के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। छात्राओं ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि सोनू कुशवाहा थार, स्कूटर और अन्य वाहनों से छात्रावास आते हैं, जिन पर नंबर प्लेट नहीं लगी होती। छात्राओं का दावा है कि उनके पास संबंधित वाहनों के फोटो और वीडियो प्रमाण भी हैं, जिनकी जांच कराने की मांग उन्होंने की है। यह आरोप सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है, क्योंकि बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों का उपयोग संदिग्ध गतिविधियों की ओर इशारा कर सकता है। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग कर विभाग में भेजी जाती है। यह बात छात्राओं की गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन करती है। शिकायत में पेयजल संकट के दौरान भी संबंधित व्यक्ति द्वारा हस्तक्षेप किए जाने की बात कही गई है, जो दर्शाता है कि वह छात्रावास के आंतरिक मामलों में भी दखल दे रहा है। कलेक्टर के नाम ज्ञापन लेने वाली संयुक्त कलेक्टर शिवानी तरेटिया ने छात्राओं की शिकायत पर संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि छात्राओं ने एक व्यक्ति के खिलाफ नामजद शिकायत की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वह निर्धारित नियमों के विपरीत और असमय छात्रावास परिसर में प्रवेश करता है। छात्राओं ने उसके प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। संयुक्त कलेक्टर शिवानी तरेटिया ने छात्राओं को आश्वासन दिया कि शिकायत में आए सभी बिंदुओं की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे। सीसीटीवी कैमरे हटाने के आरोपों पर भी उन्होंने जांच कराने की बात कही, जिससे छात्राओं को आश्वस्त किया जा सके कि उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। छात्रा किरण सूर्यवंशी ने बताया कि वे स्वयं कलेक्टर से मिलना चाहती थीं, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। उनकी ओर से ज्ञापन लेने आई अधिकारी ने दो से तीन दिन में समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है। यह समय-सीमा छात्राओं के लिए एक उम्मीद की किरण है, लेकिन वे सुरक्षा सुनिश्चित होने तक संतुष्ट नहीं होंगी। छात्राओं ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें सुरक्षा नहीं मिली तो वे अपनी शिकायत लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक जाएंगी। यह चेतावनी मामले की गंभीरता को दर्शाती है और प्रशासन पर दबाव बनाती है कि वह तत्काल कार्रवाई करे। छात्राओं के पास अब कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है। इस मामले में सोनू कुशवाहा से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। उनका पक्ष मिलने पर उसे प्रकाशित किया जाएगा। किसी भी मामले में दोनों पक्षों को सुनना निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए आवश्यक है। यह घटना उज्जैन में स्थित आदिवासी कन्या महाविद्यालयीन छात्रावास की है, जहाँ बाहरी व्यक्ति के हस्तक्षेप से छात्राएं लगातार परेशान हैं। यह मामला छात्राओं की सुरक्षा, गोपनीयता और छात्रावास के सुचारू संचालन से जुड़ा है। छात्राओं ने आरोप लगाया है कि सोनू कुशवाहा छात्रावास परिसर में बार-बार आते हैं और उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं। यह स्थिति उन्हें असुरक्षित महसूस कराती है और उनकी पढ़ाई पर भी असर डालती है। अधीक्षिका प्रीति चंदेल ने 8 अक्टूबर को ही इस मामले की शिकायत जिला संयोजक और संभागीय उपायुक्त से की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे छात्राओं का धैर्य जवाब दे गया और उन्हें सीधे कलेक्टर से गुहार लगानी पड़ी। सोनू कुशवाहा के छात्रावास परिसर में आने के समय भी अनिश्चित हैं। कभी वे दिन में 4-5 बार आते हैं, तो कभी रात 8 से 9 बजे के बीच भी उनकी आवाजाही देखी जाती है। यह अनियमितता छात्राओं के लिए चिंता का विषय है। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया है कि सोनू कुशवाहा उनकी गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग करते हैं और उसे विभाग में भेजते हैं। यह उनकी निजता का उल्लंघन है और उन्हें मानसिक रूप से परेशान करता है। संयुक्त कलेक्टर शिवानी तरेटिया ने सभी आरोपों की जांच का आश्वासन दिया है।
