हॉकी टीम ने 44 साल बाद जीता गोल्ड, कुल 16 मेडल हुए
भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल के लंबे इंतजार के बाद एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। फाइनल मुकाबले में भारत ने चीन को 1-0 से मात दी। इस शानदार जीत के साथ टीम ने 2028 ओलिंपिक के लिए भी अपना स्थान पक्का कर लिया है। भारत ने इससे पहले 1982 में साउथ कोरिया को हराकर यह खिताब जीता था। गोलकीपर सविता पूनिया ने पहले हाफ में एक पेनल्टी स्ट्रोक रोककर टीम की बढ़त बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। लालरेमसियामी ने एकमात्र गोल करके भारत को बढ़त दिलाई थी, जिसकी शुरुआत सलीमा टेटे के खेल से हुई थी और साक्षी ने फाइनल पास दिया था। यह जीत भारतीय हॉकी के लिए एक ऐतिहासिक पल है, जिसने 44 साल के सूखे को खत्म किया। टीम ने फाइनल में चीन को कड़े मुकाबले में हराया। गोलकीपर सविता पूनिया ने महत्वपूर्ण पेनल्टी स्ट्रोक बचाकर भारत की बढ़त को कायम रखा। लालरेमसियामी ने मैच का एकमात्र गोल दागा, जो टीम की जीत का आधार बना।
महिला रिकर्व टीम ने भी गोल्ड जीता। कुमकुम मोहोड, अंकिता भक्त और कीर्ति की तिकड़ी ने फाइनल में साउथ कोरिया को हराया। कुमकुम ने दबाव में 10 अंक हासिल किए, जबकि अंकिता ने अनुभव का इस्तेमाल किया। बॉक्सिंग में लवलीना बोरगोहेन ने जन्मदिन पर गोल्ड जीता। उन्होंने फाइनल में चीन की बाओ जियी को 5-0 से हराया। परवीन हुड्डा ने भी 65 किग्रा में गोल्ड जीता, जबकि अंकुश पंघाल ने पुरुषों की 80 किग्रा वर्ग में चैंपियन बने। सुजीत कलकल ने कुश्ती में 65 किग्रा फ्रीस्टाइल में गोल्ड जीता। फाइनल में वह पिछड़ रहे थे, लेकिन वापसी कर ली। गोल्फ में प्रणवी उर्स फाइनल राउंड से पहले टॉप पर हैं। टीम इवेंट में भारत दूसरे स्थान पर है। सेपकटकरा में मेंस टीम ने ब्रॉन्ज जीता, वहीं सेलिंग में नेथरा कुमानन को भी ब्रॉन्ज मिला। एशियाई खेलों में 13वें दिन भारत ने कई मेडल जीते, जिससे देश का उत्साह बढ़ा। हॉकी, तीरंदाजी, बॉक्सिंग और कुश्ती में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला।

