उज्जैन के कलाकार रवि आकोदिया ने इस बार महात्मा गांधी को एक अनोखे अंदाज में श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने दाल, चावल और अन्य अनाज के दानों का इस्तेमाल करके बापू का एक अद्भुत पोर्ट्रेट तैयार किया है। यह कलाकृति न केवल गांधी जयंती के अवसर पर बापू को याद करने का एक अनूठा तरीका है, बल्कि यह अन्न के महत्व और उसके सम्मान का संदेश भी देती है। रवि, जो पंजाब नेशनल बैंक में नौकरी करते हैं, अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद कला के प्रति अपने जुनून को जीवित रखे हुए हैं। रवि पिछले कई वर्षों से गांधी जयंती पर महात्मा गांधी को अलग-अलग माध्यमों से श्रद्धांजलि देते आ रहे हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने जमीन पर बालू-रेत से गांधी जी की तस्वीर बनाई थी। इस बार उन्होंने कैनवास को अपना माध्यम चुना और रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले अनाज को अपनी कला का हिस्सा बनाया। उन्होंने कोई महंगा सामान नहीं खरीदा, बल्कि घर में उपलब्ध दाल, चावल और अन्य अनाजों का ही प्रयोग किया। इस कलाकृति के लिए मुख्य रूप से कैनवास और दानों को चिपकाने के लिए फेविकोल का उपयोग किया गया। इस पोर्ट्रेट को बनाने में रवि को करीब 4 से 5 घंटे का समय लगा। उन्होंने कैनवास पर पहले बापू का स्केच तैयार किया और फिर बारीकी से एक-एक दाना चिपकाकर उनकी छवि को जीवंत किया। इस कलाकृति में लगभग 5 से 6 प्रकार की दालें, चावल और अन्य अनाज शामिल हैं। पूरी कलाकृति में लगभग 1 से 1.5 किलो अनाज का इस्तेमाल हुआ। इस प्रकार, उन्होंने न केवल कला का एक अनूठा नमूना पेश किया, बल्कि अन्न की बर्बादी रोकने और उसके सम्मान के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास किया। रवि का मानना है कि जिस तरह गांधी जी के विचारों और आदर्शों का सम्मान किया जाता है, उसी तरह अन्न का भी सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा, "गांधी जी को केवल नाम से याद करने के बजाय उनके सत्य और अहिंसा के विचारों को अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। " उन्होंने यह भी बताया कि इस साल प्रदेश में बारिश कम हुई है, ऐसे में अन्न का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस कलाकृति के माध्यम से वे लोगों को अन्न की महत्ता का संदेश देना चाहते हैं। यह कलाकृति आत्मसंतुष्टि और गांधी जी के प्रति अपने तरीके से श्रद्धांजलि देने के लिए बनाई गई है, न कि किसी पुरस्कार की चाहत में। रवि ने इससे पहले ड्राइंग, स्केचिंग, पेंटिंग और कैनवास पर भी बापू के पोर्ट्रेट बनाए हैं। उनकी यह पहल दर्शाती है कि कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संदेश देने का एक शक्तिशाली माध्यम भी बन सकती है। बैंक की नौकरी के कारण रवि को अपनी कला के लिए ज्यादा समय नहीं मिल पाता, लेकिन वे अपने शौक को पूरा करने के लिए समय जरूर निकालते हैं। उनका यह समर्पण और रचनात्मकता सराहनीय है, जो उन्हें अन्य कलाकारों से अलग बनाती है। इस बार उन्होंने दाल और अनाज को माध्यम के तौर पर चुना, जो कि एक अप्रत्याशित और नवीन विचार था। उन्होंने कैनवास पर गांधी जी की ड्राइंग तैयार की और फिर एक-एक दाना ध्यानपूर्वक चिपकाया। यह प्रक्रिया अत्यंत धैर्य और एकाग्रता की मांग करती है। इस पूरी कलाकृति को बनाने में लगभग 1 से 1.5 किलो अनाज का इस्तेमाल हुआ। विभिन्न प्रकार की दालें और चावल मिलकर बापू की छवि को एक अनूठा रूप देते हैं।
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दाल-चावल से बापू का पोर्ट्रेट: उज्जैन के रवि आकोदिया ने गांधी जयंती पर दी अनूठी श्रद्धांजलि, 4-5 घंटे में तैयार
2 अक्टूबर 2026 को 10:57 pm बजे

दाल-चावल से बापू का पोर्ट्रेट: उज्जैन के रवि आकोदिया ने गांधी जयंती पर दी अनूठी श्रद्धांजलि, 4-5 घंटे में तैयार
