36 की मौत, 52 पर एफआईआर दर्ज
सागर जिले के बंडा में जहरीली शराब से 36 लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है। इस रैकेट की कड़ियां दिल्ली, ग्वालियर, मुरैना और कानपुर तक फैली हुई हैं। जांच में पता चला है कि मुख्य आरोपियों को शराब के जहरीले और अमानक होने की जानकारी घटना से पहले ही लग गई थी, लेकिन उन्होंने नुकसान से बचने के लिए सप्लाई रोकी और न ही प्रशासन को सूचित किया। इसके बजाय, उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए मौत की शराब बेचना जारी रखा। पुलिस ने जेल से मिले एक गोपनीय इनपुट के आधार पर जांच शुरू की और अब तक 52 आरोपियों को नामजद किया है, जिनमें से 36 को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह जहरीली शराब बनाने का काम मुख्य आरोपी रवि लखेरा ने मुरैना के दिनेश शिवहरे और उसकी टीम को बंडा में बुलाया था। दिल्ली की 'आरएन केमिकल' फर्म से 5 ड्रम औद्योगिक स्प्रिट और थिनर मंगवाया गया था, जिसे 5 प्लास्टिक ड्रम में भरकर दिल्ली से सागर भेजा गया। नकली रैपर ग्वालियर से कोरियर से मंगाए गए, जबकि बोतलें, ढक्कन और कार्टन ट्रांसपोर्ट तथा निजी वाहनों से चंद्रभान के घर पहुंचाए गए। इन्हीं सांचों में जहरीली शराब की बॉटलें तैयार की जाती थीं। 3 सितंबर को चंद्रभान के घर शराब तैयार की गई और लाइसेंसी दुकान की आड़ में इसे नौराज, गूगरा, छापरी, जगथर समेत आधा दर्जन से अधिक गांवों के एजेंटों तक पहुंचा दिया गया। शराब चखने वाले साथी देवा जाटव की आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई, जबकि दिनेश शिवहरे की हालत गंभीर होने पर उसे बंसल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

