मुख्यमंत्री ने 'इंडिया केम 2026' में मप्र को ग्लोबल हब बनाने का संकल्प दोहराया
इंडिया केम - 2026 के मंच से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश के सामने एक बड़ा संकल्प रखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2040 तक रसायन एवं उर्वरक से जुड़े वाणिज्यिक व्यवसायों का टर्नओवर 1 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की पूर्ति के लिए देश की सभी राज्य सरकारें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ केंद्र सरकार के साथ कदमताल कर रही हैं। डॉ. यादव ने बताया कि मध्य प्रदेश में पेट्रोकेमिकल्स, पेट्रो पॉलिमर्स, फर्टिलाइजर्स, विभिन्न प्रकार के रसायनों एवं दवाओं के निर्माण के लिए अनेक अवसर उपलब्ध हैं। राज्य सरकार ने मप्र में निवेश के लिए एक बेहद आसान, सरलीकृत और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मुंबई के बॉम्बे एग्ज़िबिशन सेंटर में हो रहे तीन दिवसीय 'इंडिया केम 2026' के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रसायन एवं उर्वरक क्षेत्र में निवेश के इच्छुक सभी निवेशकों को पूरी सुविधा, सहयोग और सुरक्षा देने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य प्रदेश को रसायन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योग के प्रमुख 'ग्लोबल हब' के रूप में स्थापित करने के राज्य सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने देश-विदेश के उद्योगपतियों और निवेशकों को वर्ष 2027 में होने वाली 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' में शामिल होने के लिए आमंत्रित भी किया। इस वर्ष इंडिया केम-2026 की थीम 'एडवांटेज भारत – एन इमर्जिंग ग्लोबल केमिकल्स हब' रखी गई है, जो 24 अक्टूबर तक चलेगा। मध्य प्रदेश, आंध्रप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल इस बार स्टेट पार्टनर्स के रूप में इंडिया केम से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि बीना मध्य प्रदेश के पेट्रोकेमिकल उद्योग का नया गढ़ बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सागर जिले के बीना में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल यूनिट का भूमि-पूजन किया जा चुका है। यहां हर साल 22 लाख टन से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार होंगे। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की लगभग 49 हजार करोड़ रुपये की एथिलीन क्रैकर एवं रिफाइनरी विस्तार परियोजना भी मध्य भारत में पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों के लिए अवसर उपलब्ध कराएगी। उन्होंने इंडियन ऑयल, रिलायंस और हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स जैसी कंपनियों से बीना के आसपास पॉलिमर प्रसंस्करण और वितरण की संभावनाएं तलाशने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केवल बड़ी परियोजनाओं तक सीमित न रहकर राज्य में पॉलिमर प्रोसेसिंग का सुदृढ़ क्लस्टर विकसित किया जाएगा, ताकि एमएसएमई भी साथ-साथ सशक्त हों। इसी दिशा में रायसेन के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर के बिलौआ में 93 एकड़ में अत्याधुनिक प्लास्टिक पार्क तैयार किए गए हैं। तामोट में केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सिपेट) का उन्नत प्लास्टिक उत्पाद अनुकरण एवं मूल्यांकन केंद्र भी स्थापित है। धार में विकसित हो रहे पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क से टेक्सटाइल के साथ पॉलिमर, केमिकल और सहायक उद्योगों के लिए भी अवसर बनेंगे। गैस आधारित उद्योगों के लिए विजयपुर की भूमिका रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि यहां गेल का आधुनिक गैस प्रसंस्करण ढांचा पहले से मौजूद है, जिसकी 2 गैस प्रसंस्करण इकाइयाँ हैं। यहां 10 मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र भी स्थापित है, जिसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 4.3 टन है। सीहोर जिले के आष्टा में गेल इंडिया की पेट्रोकेमिकल परियोजना को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। नागदा में ग्रासिम इंडस्ट्रीज का वृहद औद्योगिक परिसर प्रदेश की रासायनिक उद्योग क्षमता का प्रत्यक्ष उदाहरण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूपीएल, पीआई इंडस्ट्रीज, धनुका और सिंजेंटा जैसी कंपनियों से मध्य प्रदेश को केवल बाज़ार नहीं, विनिर्माण के लिए भी चुनने का आग्रह किया।
