मुख्यमंत्री और वीआईपी की यात्राएं शुरू होने में अभी 45 दिन लगेंगे, जबकि नया विमान भोपाल पहुंच चुका है
मध्य प्रदेश सरकार का नया बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 जेट विमान मंगलवार को भोपाल के स्टेट हैंगर पहुंच गया। करीब ढाई साल पहले विमान खरीदने की मंजूरी मिलने के बाद अब यह सरकार के बेड़े में शामिल होने जा रहा है। हालांकि, विमान के पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी इसकी यात्रा तुरंत शुरू कर सकेंगे। नियमित उड़ान से पहले विमान के पंजीयन, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से संबंधित मंजूरियों, तकनीकी जांच और पायलटों की जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। इन प्रक्रियाओं में करीब 45 दिन लगने का अनुमान है। 10 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, विमान के बीमा की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। बीमा में विमान के साथ यात्रियों और सामान को शामिल करने का प्रस्ताव है। 250 करोड़ से ज्यादा की लागत वाले कनाडा की विमान निर्माता कंपनी बॉम्बार्डियर का चैलेंजर 3500 आधुनिक बिजनेस जेट की श्रेणी में आता है। इसकी खरीद की लागत अलग-अलग रिपोर्टों में करीब 230 से 250 करोड़ रुपए बताई गई है, और कर व अन्य खर्च जोड़ने पर कुल लागत के अनुमान भी अलग हैं। जेट के लिए करीब 268 करोड़ रुपए का बीमा प्रस्तावित किया गया है। बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 के संचालन के लिए करीब 1800 मीटर या इससे अधिक लंबे रनवे की जरूरत बताई गई है। प्रदेश की करीब 20 हवाई पट्टियों में से केवल 3 पर ही इतनी लंबाई का रनवे है, जो इस विमान के लिए उपयुक्त है। यह एक बड़ी बाधा है क्योंकि प्रदेश में हवाई सुविधाओं का विस्तार अभी सीमित है। सरकार के मुताबिक, नया शासकीय विमान आने के बाद हवाई यात्रा पर होने वाला मासिक खर्च मौजूदा खर्च का करीब एक-तिहाई रह जाएगा। कोविड के दौरान सरकारी विमान ग्वालियर में क्षतिग्रस्त हो गया था, तभी से चार्टर्ड विमान इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इस नए विमान से सरकारी खर्च में बड़ी बचत होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार के स्तर पर पांच नए एयरपोर्ट की मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है, जिनमें सिंगरौली को प्राथमिकता दी गई है। उड़ान योजना के तहत 10 हवाई पट्टियों को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी है। प्रदेश में हवाई सुविधाओं के विस्तार के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश में अभी 8 एयरपोर्ट, 20 से अधिक एयरस्ट्रिप और 220 हेलीपैड हैं। सरकार सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में स्थायी हेलीपैड बनाने की योजना पर भी काम कर रही है, ताकि हवाई संपर्क को और बेहतर बनाया जा सके। विमान भोपाल पहुंच गया है, लेकिन उसे नियमित सरकारी उड़ानों के लिए तैयार करने की प्रक्रिया अभी बाकी है। इन प्रक्रियाओं में करीब 45 दिन लगने का अनुमान बताया जा रहा है। DGCA की मंजूरी और पंजीयन: विमान के भारतीय पंजीयन, लागू विमानन नियमों के अनुपालन और उड़ान संचालन से जुड़ी जरूरी मंजूरियां पूरी करनी होंगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आए विमान की सीमा शुल्क संबंधी औपचारिकताएं भी आवश्यक होती हैं। विमान की तकनीकी स्थिति, उपकरणों और सुरक्षा प्रणालियों की जांच के बाद ही उसके संचालन को मंजूरी दी जा सकेगी। पायलटों की आवश्यक योग्यता, प्राधिकरण और प्रशिक्षण संबंधी शर्तें पूरी होनी चाहिए। जरूरत के अनुसार परीक्षण उड़ान और अन्य परिचालन जांच भी होंगी। यह सभी सुरक्षा मानक सुनिश्चित करेंगे। विमान की प्रकाशित तकनीकी जानकारी के अनुसार, इसकी अधिकतम उड़ान दूरी करीब 6,297 किलोमीटर है।

