फिशरीज सेक्टर को फूड प्रोसेसिंग और एमएसएमई से जोड़ा जाएगा, अन्य उद्योगों जैसी मिलेंगी छूटें
मध्य प्रदेश में अब मछली पालन केवल एक पारंपरिक व्यवसाय नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूर्ण उद्योग का दर्जा देकर राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बनाया जाएगा। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राष्ट्रीय मत्स्य सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि राज्य में फिशरीज सेक्टर को फूड प्रोसेसिंग और एमएसएमई से जोड़कर अन्य बड़े उद्योगों की तरह सभी छूट और इंसेंटिव दिए जाएंगे। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में ‘मध्य प्रदेश मत्स्य निवेश एवं निर्यात मार्गदर्शिका’ का सिंगल क्लिक से विमोचन भी किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर निजी निवेश और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्तमान समय देश और प्रदेश के लिए स्वर्णिम काल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सभी मंत्री ‘नवरत्न’ की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि जीवन की उत्पत्ति जल से हुई है और नदियों का मायका होने के नाते मध्य प्रदेश में जल स्रोतों की कोई कमी नहीं है। वर्ष 2003 के बाद से प्रदेश में सिंचाई क्षमता तेजी से बढ़ी है और देश का पहला नदी जोड़ो अभियान भी मध्य प्रदेश में ही शुरू हुआ। सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया में मत्स्य उत्पादन में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। देश में उत्पादन 95 लाख टन से बढ़कर 198 लाख टन हो चुका है। वहीं, देश का मत्स्य एक्सपोर्ट 30,213 करोड़ रुपए से बढ़कर 62,408 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इस पूरे सेक्टर पर 6 करोड़ लोगों की आजीविका टिकी है। उन्होंने मध्य प्रदेश जैसे इनलैंड (गैर-तटीय) राज्यों में एक्सपोर्ट की संभावनाएं बढ़ाने की सख्त जरूरत बताई। भोपाल में मछली पालकों, मछुआरों और निर्यातकों को एक मंच पर लाना एक सराहनीय पहल है, जिससे मध्य प्रदेश विकसित और आत्मनिर्भर बनेगा। केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने बताया कि साल 2019 में कृषि से अलग नया मंत्रालय बनने के बाद से फिशरीज सेक्टर में अभूतपूर्व प्रगति आई है। भारत आज दुग्ध उत्पादन में दुनिया में नंबर-1 और मत्स्य उत्पादन में नंबर-2 पर है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह के विभाग की तारीफ करते हुए कहा कि यह कार्यकाल इस विभाग का ‘गोल्डन पीरियड’ है। पहली बार फिशरीज सेक्टर में निजी निवेश और एक्सपोर्ट के लिए उद्योग जगत आगे आ रहा है। बघेल ने आगे कहा कि देश में 75% योगदान इनलैंड फिशरीज का है और केवल 25% मरीन (समुद्री) फिशरीज का। समुद्र न होते हुए भी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य इनलैंड फिशरीज और एक्सपोर्ट में आगे बढ़ सकते हैं। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कुवैत की जबेदी अल कुवैत फिशरीज कंपनी और मध्य प्रदेश सरकार के बीच एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) हो चुका है।

