आबकारी अधिकारी पर शराब दुकान का ठेका दिलाने के लिए पौने तीन करोड़ की फर्जी एफडीआर स्वीकार करने में मदद करने का आरोप है
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शराब ठेके से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। लोकायुक्त संगठन ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी रहे तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचूरा के खिलाफ भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया है। लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में दर्ज हुई प्राथमिकी में रायचूरा को नामजद आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि दीपम रायचूरा ने भोपाल में शराब की दुकान का ठेका दिलाने के लिए शराब ठेकेदार जसवंत सिंह की लगभग पौने तीन करोड़ रुपये की फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडीआर) स्वीकार करने में मदद की। इस कृत्य से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। लोकायुक्त संगठन इस पूरे रैकेट की जांच कर रहा है। जांच के दायरे में कई अन्य अधिकारी और ठेकेदार भी आ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह फर्जीवाड़ा काफी समय से चल रहा था और इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गई हैं। लोकायुक्त की कार्रवाई से आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है। लोकायुक्त संगठन ने दीपम रायचूरा और शराब ठेकेदार जसवंत सिंह के खिलाफ भारतीय दंड विधान की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

