नए मैनुअल में फरलो और आपातकालीन पैरोल की भी व्यवस्था होगी
मध्य प्रदेश की जेलों में 58 साल पुराने जेल मैनुअल को बदलने की तैयारी है। इसका मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार हो चुका है और सरकार की मंजूरी मिलते ही इसे इस साल के अंत तक लागू किया जा सकता है। नए मैनुअल में बंदियों को सजा देने के बजाय उनके सुधार और पुनर्वास पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। खास बात यह है कि महिला कैदियों की तरह अब पुरुष कैदियों को भी 6 साल तक के बच्चों को अपने साथ रखने की अनुमति मिलेगी, बशर्ते उनके परिवार में बच्चे की देखभाल के लिए कोई अन्य सदस्य न हो। नए मैनुअल में फरलो (छुट्टी) की व्यवस्था भी शामिल की गई है, जिसके तहत पात्र बंदियों को सजा की तय अवधि पूरी करने के बाद परिवार से मिलने के लिए अवकाश मिलेगा। इसके अलावा, आपातकालीन पैरोल, विचाराधीन बंदियों को अलग रखना और थर्ड जेंडर बंदियों के लिए विशेष व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं। इन प्रावधानों पर हाल ही में मंत्रालय में मुख्य सचिव और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। नए मैनुअल के तहत, सजायाफ्ता बंदियों को एक-तिहाई सजा पूरी करने और अच्छे आचरण पर पारिवारिक काम या बीमारी के लिए 14 दिन की अस्थायी रिहाई मिल सकेगी। वहीं, 23946 पुरुष बंदी विचाराधीन हैं और 902 महिला बंदी विचाराधीन हैं।
