सऊदी अरब में हूती हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत इस बात की याद दिलाती है कि यमन के शिया विद्रोहियों और रियाद के बीच संघर्ष बढ़ने के साथ ही सऊदी अरब के भारतीय समुदाय के लिए खतरे कितने गंभीर हैं। जुलाई में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच लड़ाई फिर से शुरू होने के बाद से, कम दो भारतीयों की जान जा चुकी है और 14 अन्य घायल हुए हैं। गुरुवार को हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि लाल सागर में यमन के ज़ुकार द्वीप के पास सऊदी बलों ने 14 भारतीयों वाली एक नौका को निशाना बनाया था और बचाव अभियान जारी थे। हूती, जो उत्तरी यमन के हिस्सों और पूरे लाल सागर तट पर नियंत्रण रखते हैं, सऊदी बुनियादी ढांचे, तेल सुविधाओं और हवाई अड्डों पर हमले तेज कर रहे हैं। ऐसे में, सऊदी अरब का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय होने के नाते, भारतीय इस हमले की चपेट में आने का जोखिम उठा रहे हैं। उड़ानों में व्यवधान के कारण, हजारों भारतीय तीर्थयात्री फंसे हुए हैं। भारत ने हूती हमलों की निंदा की है और कहा है कि वह सऊदी अरब के साथ एकजुटता से खड़ा है। लड़ाई का कोई अंत नजर नहीं आ रहा है और इज़राइल तथा अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले फिर से शुरू होने की उच्च संभावना के साथ, पश्चिम एशिया में और अधिक हिंसा और अस्थिरता भारत के लिए विकल्पों को तेजी से कठिन बना सकती है। सऊदी अरब में भारतीय मिशन फंसे हुए तीर्थयात्रियों की शीघ्र वापसी की सुविधा के लिए काम कर रहे हैं। यमन के तट पर नौका घटना में 14 भारतीय सुरक्षित बताए गए हैं। ये भारतीय मिशन फंसे हुए तीर्थयात्रियों की शीघ्र वापसी की सुविधा के लिए काम कर रहे हैं। सऊदी-हूती संघर्ष 2014 में हूती विद्रोहियों द्वारा यमन की राजधानी सना पर कब्जा करने के साथ शुरू हुआ था। एक साल बाद, सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों को बाहर निकालने के लिए यमन पर बमबारी शुरू कर दी। लेकिन अरब के सबसे गरीब देशों में से एक पर सालों की सऊदी बमबारी अप्रभावी साबित हुई है; हूती विद्रोहियों ने उत्तरी यमन के जनजातियों के बीच अपना समर्थन मजबूत किया और एक शक्तिशाली क्षेत्रीय सेना और नौसेना बल का निर्माण किया। वर्ष 2022 में सऊदी-हूती युद्धविराम जुलाई 2026 को उस समय टूट गया जब सऊदी अरब ने लापरवाही से सना हवाई अड्डे पर बमबारी कर दी, ताकि हूती प्रतिनिधिमंडल वाले एक ईरानी विमान को उतरने से रोका जा सके। इसके बाद हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला करना शुरू कर दिया, और यमन में सऊदी समर्थित ताकतों के खिलाफ जमीनी हमला शुरू कर दिया। हूती हमले सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और यमन युद्ध के मुख्य वास्तुकार मोहम्मद बिन सलमान के लिए दशकों में सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती पेश करते हैं। बड़े पैमाने पर सऊदी हवाई हमलों ने न तो हूती विद्रोहियों को हराया है और न ही साम्राज्य की निवारक क्षमता को बहाल किया है। अपनी दौलत, प्राकृतिक संसाधनों, बुनियादी ढांचे और नाजुक शाही राजनीति के साथ, यह साम्राज्य हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, और इससे बाहर निकलने के लिए उसके पास बहुत कम अच्छे विकल्प हैं। भारत को सबसे खराब स्थिति के लिए एक आकस्मिक योजना तैयार करनी चाहिए। इसकी तत्काल प्राथमिकता फंसे हुए भारतीय तीर्थयात्रियों को निकालना होनी चाहिए। इसे स्थिरता के लिए एक मजबूत स्थिति भी व्यक्त करनी चाहिए और ईरान संकट के राजनयिक समाधान के लिए अरब देशों और तेहरान के साथ मिलकर काम करना चाहिए। फारस की खाड़ी में शांति बनाए रखने के लिए, ईरान की ओर निर्देशित बंदूकें पहले शांत होनी चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत केवल खतरों के बिना ही सफल हो सकती है। यह स्थिति भारत के लिए चिंता का विषय है, जो पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत रहा है। भारत को इस क्षेत्र में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि वह शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सके। यह संघर्ष न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि भारत के लिए भी एक गंभीर चुनौती पेश करता है। भारत की बड़ी प्रवासी आबादी सऊदी अरब में रहती है, और किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर उन पर पड़ सकता है। इसके अलावा, तीर्थयात्रियों की फंसे होने की स्थिति भारत के लिए एक मानवीय और लॉजिस्टिक संकट पैदा करती है। भारत को इस स्थिति से निपटने के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें राजनयिक प्रयास, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्रीय शांति के लिए सक्रिय भूमिका निभाना शामिल हो। सऊदी अरब और ईरान के बीच हालिया तनाव, जिसने हूती विद्रोहियों को और अधिक मुखर होने के लिए प्रेरित किया है, इस क्षेत्र को और अस्थिर बना रहा है। इस अस्थिरता का भारत के ऊर्जा आयात पर भी असर पड़ सकता है, जो पहले से ही वैश्विक अनिश्चितताओं से प्रभावित है। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों और रणनीतियों पर विचार करना चाहिए। भारत को यह समझना होगा कि पश्चिम एशिया में शांति केवल तभी संभव है जब सभी पक्ष बातचीत की मेज पर आएं और अपनी शिकायतों का समाधान करें। ईरान के साथ सीधे संवाद की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। भारत को इस संवाद को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए, भले ही यह एक नाजुक प्रक्रिया हो।
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सऊदी-हूती संघर्ष: भारत के लिए गंभीर चुनौती
24 अक्टूबर 2026 को 11:00 pm बजे
