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भारतीय उच्च शिक्षा में दाखिलों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिसमें सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा 2014-15 में 3.42 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 4.5 करोड़ हो गया है। विशेष रूप से, स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) जैसे क्षेत्रों में विद्यार्थियों की संख्या एक दशक में 91.5 लाख से बढ़कर 1.02 करोड़ हो गई है। शिक्षकों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, जो अब 17.32 लाख है, जिनमें 44.9 प्रतिशत महिलाएं हैं। महिला नामांकन दर 31.2 प्रतिशत है, जो एक सकारात्मक संकेत है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (एआइएसएचई) के अनुसार, जवाब देने वाले 1,278 विश्वविद्यालयों में से केवल 41 प्रतिशत के पास इंटर्नशिप सेल है, 45 प्रतिशत बहुविषयक कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं, और मात्र 15 प्रतिशत ने किसी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भाग लिया है। यह दर्शाता है कि नीति के प्रमुख प्रावधानों को अपनाने में विश्वविद्यालयों को अभी भी काफी काम करना है। शिक्षकों की श्रेणी में 67.2 प्रतिशत लेक्चरर या असिस्टेंट प्रोफेसर, 9.8 प्रतिशत रीडर और एसोसिएट प्रोफेसर, 9.7 प्रतिशत प्रोफेसर या समकक्ष, 5.9 प्रतिशत अस्थायी शिक्षक, 6.6 प्रतिशत प्रदर्शक एवं ट्यूटर और 0.8 प्रतिशत विजिटिंग टीचर हैं। विद्यार्थियों के अध्ययन के अनुभव और उनके करियर के चुनाव को समझना महत्वपूर्ण है। ग्रेजुएशन स्तर पर कला सबसे लोकप्रिय है, लेकिन विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और वाणिज्य जैसे विषयों में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी आकर्षित हो रहे हैं। यह जानना आवश्यक है कि वे ये विकल्प क्यों चुनते हैं, उनका अकादमिक अनुभव कैसा रहता है, और पढ़ाई पूरी करने के बाद वे क्या करते हैं।
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