तनाव मुक्ति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए ओशो ध्यान के प्रयोग कराए गए
मध्य प्रदेश के दमोह जिला जेल में ओशो संन्यासी माँ आरती राजदान ने बंदियों के लिए एक विशेष ध्यान शिविर का आयोजन किया। मुंबई से पधारीं माँ आरती राजदान, जो एक टैरो कार्ड रीडर भी हैं, ने कैदियों को तनाव से मुक्ति, आत्म-जागरूकता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ओशो ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया। इस अनूठी पहल का उद्देश्य जेल में बंद लोगों को आंतरिक शांति खोजने और जीवन के प्रति एक नया, सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित करना था। ध्यान के माध्यम से, उन्होंने बंदियों को अपनी मानसिक स्थिति को सुधारने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए आंतरिक शक्ति विकसित करने में मदद की। जेल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने कैदियों के लिए एक शांत और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया, जहाँ उन्होंने बाहरी दुनिया के दबावों से कुछ समय के लिए राहत पाई। कार्यक्रम के दौरान, माँ आरती राजदान ने ओशो की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे ध्यान और सकारात्मक सोच जीवन में बड़े बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने बंदियों को यह समझने में मदद की कि वे अपनी वर्तमान परिस्थितियों के बावजूद अपने भीतर की शांति को कैसे पा सकते हैं। उन्होंने ध्यान की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया, जिन्हें जेल के माहौल में आसानी से अपनाया जा सकता है। इन तकनीकों में श्वास पर ध्यान केंद्रित करना, सचेतनता का अभ्यास करना और सकारात्मक विचारों को विकसित करना शामिल था। कैदियों ने इन अभ्यासों में सक्रिय रूप से भाग लिया और ध्यान के माध्यम से प्राप्त होने वाली शांति और स्पष्टता का अनुभव किया। इस शिविर ने जेल के भीतर एक आशावादी और आध्यात्मिक माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस विशेष ध्यान शिविर में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें जेल अधीक्षक एमएल पटैल, जिला अभियोजन अधिकारी धर्मेन्द्र सिंह तारन, स्वामी चंद्रशेखर राय, स्वामी अनंत देव आकाश, पत्रकार संजय मौर्य और राष्ट्रीय चित्रकार काजल जी शामिल थे। जेल स्टाफ के सदस्यों और अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की महत्ता को और बढ़ाया।
