मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि राज्य के युवाओं को बेहतर शिक्षा और विकास के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता और कर्तव्य है। मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुकूल ढालने के लिए राज्य सरकार लगातार गंभीर प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को सबसे पहले लागू करने का गौरव मध्य प्रदेश को प्राप्त हुआ है, जो राज्य की प्रगतिशील सोच को दर्शाता है। उच्च शिक्षा के मोर्चे पर पिछले लगभग ढाई साल के कार्यकाल के दौरान प्रदेश में तीन नए शासकीय विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई है। इन नए संस्थानों के शुरू होने से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों तक भी उच्च शिक्षा की पहुंच आसानी से सुनिश्चित हो रही है। सरकार का यह भी मानना है कि केवल भौतिक विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानव संसाधन का सुदृढ़ीकरण भी उतना ही आवश्यक है। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित और उज्ज्वल बनाने के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों को तेजी से लागू किया जा रहा है। 25 जुलाई को आयोजित एक विशेष चर्चा के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने इन सभी प्राथमिकताओं का खुलकर जिक्र किया। शिक्षक और विद्यार्थी वर्ग से जुड़ी हर चुनौती पर सरकार पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ विचार कर रही है ताकि किसी को असुविधा न हो। यह पूरा खाका केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य हर छात्र को अपनी पूरी क्षमता दिखाने का एक मजबूत मंच देना है। राज्य सरकार के इन दूरगामी कदमों से प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों को सीधा लाभ मिलना तय माना जा रहा है।
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युवाओं को शिक्षा देना सरकार का कर्तव्य
राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सबसे पहले लागू करने वाले मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा के प्रसार के लिए तीन नए शासकीय विश्वविद्यालय शुरू किए गए हैं
शहर संवाददाता26 जुलाई 2026 को 6:00 am बजे
