भोपाल पश्चिमी बायपास निर्माण हेतु समसगढ़ और दूबड़ी गांवों की सरकारी जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव है, जिस पर दावे-आपत्तियां मांगी गई हैं
35.61 किमी लंबा बायपास 3774 करोड़ में बनेगा
भोपाल। राजधानी में पश्चिमी बायपास निर्माण के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हुजूर तहसील के समसगढ़ और दूबड़ी गांवों की 4.3494 हेक्टेयर (लगभग 10.75 एकड़) सरकारी जमीन इस परियोजना के लिए प्रस्तावित है। प्रशासन ने संबंधित व्यक्तियों, संस्थाओं और ग्रामवासियों से 15 दिनों के भीतर दावे-आपत्तियां मांगी हैं। यह बायपास 35.61 किलोमीटर लंबा होगा और इसकी कुल परियोजना लागत 3774 करोड़ रुपए स्वीकृत की गई है। समसगढ़ गांव में कुल 19.89 हेक्टेयर सरकारी जमीन दर्ज है, जिसमें से 3.4477 हेक्टेयर जमीन इस परियोजना हेतु प्रस्तावित है। इसी तरह, दूबड़ी गांव की छह खसरा प्रविष्टियों की कुल 5.46 हेक्टेयर जमीन में से 0.9017 हेक्टेयर जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित भूमि में रास्ते, नाले, वृक्षकुंज, वृक्षारोपण, निस्तार और खेती योग्य भूमि की श्रेणियां शामिल हैं। इन आपत्तियों और दावों पर साक्ष्यों के साथ नियमानुसार अगली कार्रवाई की जाएगी। राज्य मंत्रिमंडल ने 1 सितंबर 2026 को पश्चिमी भोपाल बायपास की संशोधित परियोजना को मंजूरी दी थी। इस चार लेन मार्ग के निर्माण पर 3225.51 करोड़ रुपये और निर्माण से पहले की गतिविधियों पर 548.29 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है। दोनों मदों को मिलाकर परियोजना की कुल लागत 3773.80 करोड़ रुपये (लगभग 3774 करोड़ रुपये) है। मार्ग के पुराने प्रस्ताव में लंबाई 40.90 किलोमीटर थी, जिसे संशोधित मार्ग में घटाकर 35.61 किलोमीटर किया गया है। नया मार्ग भोपाल-जबलपुर दिशा में भोपाल-देवास मार्ग पर फंदा तक प्रस्तावित है। इसके निर्माण से भोपाल से इंदौर जाने वाले वाहनों की दूरी करीब 21 किलोमीटर कम होने का अनुमान है।
संशोधित परियोजना में पर्यावरणीय परिस्थितियों और वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को विशेष महत्व दिया गया है। अलग-अलग गांवों में भूमि संबंधी प्रक्रियाएं अब तेजी से आगे बढ़ाई जा रही हैं।
इस परियोजना से भोपाल से इंदौर की दूरी कम होने के साथ-साथ यातायात सुगम होने की उम्मीद है। प्रशासन ने लोगों से 15 दिनों के भीतर दावे-आपत्तियां मांगी हैं। यह बायपास 35.61 किलोमीटर लंबा होगा। कुल परियोजना लागत 3774 करोड़ रुपए स्वीकृत की गई है। प्रस्तावित भूमि में रास्ते, नाले, वृक्षकुंज, वृक्षारोपण, निस्तार और खेती योग्य भूमि की श्रेणियां शामिल हैं।


