इंदौर में विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में पूरे उत्साह से मनाया जा रहा है। शहर के दशहरा मैदान और चिमनबाग मैदान सहित विभिन्न स्थानों पर रावण दहन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। दशहरा मैदान में 111 फीट ऊंचे रावण के पुतले के साथ 250 फीट लंबी लंका का दहन किया जाएगा, जो इस वर्ष का मुख्य आकर्षण होगा। वहीं, चिमनबाग मैदान में 110 फीट ऊंचा रावण लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। इन आयोजनों के बीच, शहर में एक अनूठी परंपरा भी निभाई जा रही है, जहां रावण का दहन नहीं, बल्कि उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। परदेशीपुरा के गौहर नगर स्थित लंकेश्वर महादेव मंदिर में विजयादशमी पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। इंदौर के इस लंकेश्वर महादेव मंदिर की परंपरा शहर के अन्य दशहरा आयोजनों से बिल्कुल अलग है। यहां रावण को केवल एक खलनायक के रूप में नहीं, बल्कि भगवान शिव का परम भक्त और प्रकांड विद्वान मानते हुए उनकी पूजा की जाती है। मंदिर में दशानन रावण की एक भव्य प्रतिमा स्थापित है, जिसकी प्राण प्रतिष्ठा 10 अक्टूबर 2010 को सुबह 10 बजकर 10 मिनट और 10 सेकंड पर की गई थी। प्रतिमा की स्थापना का यह विशेष मुहूर्त भी मंदिर की पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। मंदिर की देखरेख करने वाले गौहर परिवार के अनुसार, उनका परिवार वर्ष 1969 से रावण की आराधना करता आ रहा है। परिवार की गहरी आस्था है कि रावण के व्यक्तित्व को केवल उसके नकारात्मक पक्ष तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उनकी विद्वता, भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति और धार्मिक ज्ञान को भी महत्व दिया जाना चाहिए। इसी मान्यता और आस्था के चलते गौहर परिवार ने वर्षों से यह अनूठी परंपरा को कायम रखा है, जो समाज को एक अलग दृष्टिकोण प्रदान करती है। विजयादशमी के अवसर पर लंकेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजन, हवन और आरती का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा, श्रद्धालुओं के लिए कन्या भोज, अवध पूजन तथा दूध और जल से अभिषेक जैसे कई धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की वर्षों पुरानी इस अनूठी परंपरा का हिस्सा बनते हैं। यह आयोजन शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। इंदौर में विजयादशमी का पर्व विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, जो शहर की सांस्कृतिक समृद्धता को दर्शाता है। एक ओर जहां दशहरा मैदान और चिमनबाग मैदान में रावण के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा, वहीं दूसरी ओर लंकेश्वर महादेव मंदिर में रावण की विद्वता और शिवभक्ति के सम्मान में उनकी पूजा-अर्चना होगी। रावण दहन के लिए दशहरा मैदान में 111 फीट ऊंचे पुतले की तैयारी की गई है। इसके साथ ही 250 फीट लंबी लंका का भी निर्माण किया गया है, जिसका दहन किया जाएगा। यह आयोजन शहरवासियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र होता है, जहां बड़ी संख्या में लोग बुराई के अंत का प्रतीक देखने के लिए एकत्र होते हैं। वहीं, चिमनबाग मैदान में भी रावण दहन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। यहां 110 फीट ऊंचा रावण लोगों के आकर्षण का मुख्य बिंदु रहेगा। दोनों ही मैदानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। आयोजक यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि पर्व का उल्लास बिना किसी बाधा के मनाया जा सके। लंकेश्वर महादेव मंदिर में रावण की पूजा की परंपरा 1969 से चली आ रही है। इस मान्यता के चलते मंदिर में रावण की प्रतिमा स्थापित है और विजयादशमी पर विशेष अनुष्ठान होते हैं।
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इंदौर का अनोखा दशहरा: कहीं रावण दहन, तो कहीं होती है पूजा-अर्चना
20 अक्टूबर 2026 को 10:29 pm बजे

इंदौर का अनोखा दशहरा: कहीं रावण दहन, तो कहीं होती है पूजा-अर्चना
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