मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर-देवास बायपास की बदहाल स्थिति पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायालय ने प्राधिकरण को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शुक्रवार को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर बताया जाए कि सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के बाद क्या काम किया गया है। यह मामला मातृ फाउंडेशन द्वारा 2021 में दायर की गई जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें बायपास पर बड़े गड्ढों, टूटी सर्विस रोड, खुले ड्रेनेज, जलभराव, दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पॉट, अव्यवस्थित ट्रैफिक और जानलेवा सड़कों जैसी गंभीर समस्याओं को उजागर किया गया था। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराने का निवेदन किया गया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अभिभाषक अमय बजाज ने कोर्ट को बताया कि 11 अगस्त को पिछली सुनवाई में भी यह अवगत कराया गया था कि एनएचएआइ की लापरवाही के कारण यहां कभी भी हादसा हो सकता है। कोर्ट ने तब भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राधिकरण को काम करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, एनएचएआइ ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। दुखद है कि 14 तारीख को इसी बायपास पर हुए एक हादसे में एक महिला की जान चली गई। यह घटना बायपास की बदहाल स्थिति की ओर स्पष्ट इशारा करती है। अभिभाषक अमय बजाज ने न्यायालय को अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए आदेशों का पालन अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि याचिका में उठाए गए मुद्दे अत्यंत गंभीर हैं और सीधे तौर पर आमजन की सुरक्षा से जुड़े हैं। बायपास की वर्तमान स्थिति यात्रियों के लिए जान का जोखिम पैदा कर रही है, और एनएचएआइ की निष्क्रियता इस स्थिति को और भयावह बना रही है। उन्होंने न्यायालय से आग्रह किया कि प्राधिकरण को तत्काल इन समस्याओं के समाधान के लिए बाध्य किया जाए। इस पर एनएचएआइ की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि उनकी ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है। सीनियर एडवोकेट दिल्ली को आज पेश होना था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हो पाए। उन्होंने कोर्ट से कुछ समय मांगा ताकि वे पूरी जानकारी के साथ उपस्थित हो सकें। हालांकि, न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और उन्हें शुक्रवार को अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर किए गए कार्यों का विवरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया। कोर्ट का यह रवैया इस बात का संकेत देता है कि वह मामले की गंभीरता को समझता है और त्वरित कार्रवाई चाहता है। ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाले हादसों और मौतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अवैध पार्किंग, अवैध ढाबों, व्यावसायिक अतिक्रमण और असुरक्षित तरीके से वाहनों को रोके जाने जैसी गतिविधियों को तत्काल नियंत्रित करने के आदेश जारी किए थे। इन आदेशों का उद्देश्य राजमार्गों को सुरक्षित बनाना और यात्रियों के जीवन की रक्षा करना था। हालांकि, इंदौर-देवास बायपास के मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि इन आदेशों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया जा रहा है।
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बदहाल बायपास पर हाईकोर्ट की एनएचएआइ को फटकार
15 अक्टूबर 2026 को 11:22 pm बजे

बदहाल बायपास पर हाईकोर्ट की एनएचएआइ को फटकार
