मुख्यमंत्री यादव और केंद्रीय मंत्री सिंह शुक्रवार 23 अक्टूबर को करेंगे शुभारंभ
निवेश, मूल्य संवर्धन
यह कदम राज्य में मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा। सम्मेलन में मत्स्य पालन से जुड़े हितग्राहियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष पहल की जाएगी। किसान क्रेडिट कार्ड, मत्स्य सहकारी समितियों, स्टार्ट-अप्स तथा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के अंतर्गत चयनित लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे। इससे लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में एक विशेष बायर-सेलर मीट का भी आयोजन होगा। इसमें केज इन्वेस्टर्स, एक्सपोर्टर्स और पर्ल ट्रेडर्स स्थानीय उत्पादकों और उद्यमियों के साथ सीधे संवाद करेंगे। यह मीट व्यापार और निवेश के नए अवसरों की तलाश करने में सहायक सिद्ध होगी। यह कॉन्क्लेव मध्य प्रदेश को अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ मत्स्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम साबित होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह शुक्रवार 23 अक्टूबर को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में राष्ट्रीय 'फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026' का शुभारंभ करेंगे। यह आयोजन मध्य प्रदेश में मत्स्य पालन क्षेत्र में निवेश, आधुनिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात की संभावनाओं को नई दिशा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार भी शामिल होंगे। कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन को आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों, कोल्ड-चेन अधोसंरचना, मूल्य संवर्धन और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजारों से प्रभावी ढंग से जोड़ना है। इस सम्मेलन में देश भर के प्रमुख निवेशक, निर्यातक, मत्स्य उद्यमी, स्टार्ट-अप्स और संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञ भाग लेंगे। वे मत्स्य उद्योग में निवेश और व्यापार विस्तार की अपार संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श करेंगे। मध्य प्रदेश में मत्स्य पालन के लिए लगभग 4 लाख 50 हजार हेक्टेयर का विशाल जल क्षेत्र उपलब्ध है।
कार्यक्रम के दौरान, एकीकृत केज कल्चर इकाइयों का वर्चुअल उद्घाटन किया जाएगा। साथ ही, प्रदेश के जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।
