शस्त्र जहाँ शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक हैं, वहीं शास्त्र हमें ज्ञान, विवेक और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। यह भारतीय संस्कृति में शस्त्र और शास्त्र दोनों के विशेष महत्व को रेखांकित करता है। विधायक खटीक ने कहा कि शस्त्रों का उपयोग करने की स्थिति कभी न बने, यह एक महत्वपूर्ण कामना है।
विजयादशमी के पावन पर्व पर पुलिस लाइन दमोह में शस्त्र पूजन का एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति में शस्त्र और शास्त्र के अनूठे समन्वय पर प्रकाश डाला गया। शास्त्र हमें उचित-अनुचित, न्याय-अन्याय और सत्य-असत्य का बोध कराते हैं, वहीं शस्त्र सत्य की रक्षा करने तथा अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने की शक्ति प्रदान करते हैं। शस्त्र पूजन हमें जीवन में ऐसे मूल्यों को धारण करने की प्रेरणा देता है, जो समाज में सुख, शांति, समृद्धि और कानून व्यवस्था की स्थापना में सहयोगी होते हैं। विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह विचार प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी ने पुलिस ग्राउंड में आयोजित विजयादशमी के पावन पर्व पर शस्त्र पूजन कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए व्यक्त किए। राज्यमंत्री लोधी ने कहा कि विजयादशमी पर शस्त्रों की पूजा करना हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि शस्त्र पूजन भारतीय संस्कृति में शक्ति और शौर्य के साथ-साथ कर्तव्य एवं जिम्मेदारी के महत्व को भी दर्शाता है। दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी ने इस अवसर पर कहा कि वर्तमान समय में जिस प्रकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न चुनौतियां सामने आ रही हैं, ऐसे में शास्त्र और शस्त्र दोनों का अध्ययन करना आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शास्त्र और शस्त्र का ज्ञान हमारे जीवन का मूल स्वरूप है। सांसद लोधी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि आज शस्त्रों का पूजन किया गया है, लेकिन जीवन को सही ज्ञान और दिशा प्रदान करने के लिए शास्त्रों का अध्ययन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने दोहराया कि शस्त्र जहां शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक हैं, वहीं शास्त्र हमें ज्ञान, विवेक और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। हटा विधायक उमा देवी खटीक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शस्त्र पूजन की एक प्राचीन परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के निर्देशानुसार प्रदेश में शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में दमोह जिले में भी यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संस्कृति में शस्त्र और शास्त्र दोनों का विशेष महत्व है।

