दमोह जिले के शिक्षकों ने राष्ट्रीय स्तर की हस्तकला कार्यशाला में भाग लेकर जिले का नाम रोशन किया है। सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी), क्षेत्रीय केंद्र उदयपुर द्वारा आयोजित 10 दिवसीय कार्यशाला में हिस्सा लेने के बाद लौटे इन शिक्षकों ने अपने प्रशिक्षण और अनुभवों से जिले को गौरवान्वित किया है। यह कार्यशाला विद्यालयी शिक्षा में हस्तकला कौशल के समावेश तथा विद्यार्थियों में रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। यह कार्यशाला 7 से 16 अक्टूबर 2026 तक ‘विद्यालयी शिक्षा में हस्तकला कौशल का समावेश’ विषय पर आयोजित की गई थी। इस दौरान दमोह जिले के विभिन्न शासकीय विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों ने गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने कला आधारित शिक्षण पद्धतियों, हस्तकला के व्यावहारिक उपयोग तथा विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने के तरीकों को सीखा। इन शिक्षकों की भागीदारी ने न केवल उनके व्यक्तिगत ज्ञान को बढ़ाया, बल्कि जिले में कला आधारित शिक्षा को भी नई दिशा प्रदान की है। कार्यशाला में भाग लेने वाले शिक्षकों में सुरेंद्र राय, देवेंद्र सिंह ठाकुर, सीमा जैन, दशरथ प्रसाद अहिरवार, पूनम लाल अहिरवार और मलखान अहिरवार प्रमुख थे। इन सभी शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण में हिस्सा लिया और नई कलात्मक तकनीकों को आत्मसात किया। उनके द्वारा प्राप्त ज्ञान और अनुभवों का उपयोग अब वे अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को रचनात्मक एवं गतिविधि आधारित शिक्षा प्रदान करने के लिए करेंगे। इससे विद्यार्थियों में न केवल कला के प्रति रुचि बढ़ेगी, बल्कि उनके व्यावहारिक कौशल का भी विकास होगा। शिक्षकों ने इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन और उन्हें इसमें भाग लेने का अवसर प्रदान करने के लिए डॉ. संदीप शर्मा, उपनिदेशक एवं प्रशिक्षण प्रभारी, के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने डॉ. शर्मा के मार्गदर्शन और सहयोग की सराहना की, जिसने उन्हें इस प्रशिक्षण के लिए प्रेरित किया। यह प्रशिक्षण शिक्षकों के लिए एक अनूठा अनुभव रहा, जिसने उनकी व्यावसायिक क्षमताओं को और बढ़ाया है। इसके अतिरिक्त, त्रिपाल सिंह, सीसीआरटी क्षेत्रीय केंद्र दमोह, और जिला शिक्षा अधिकारी सत्यम चौरसिया को भी उनके सहयोग और अमूल्य मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इन दोनों अधिकारियों के प्रयासों से ही शिक्षकों को इस राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में भाग लेने का अवसर मिल सका। उनके सहयोग ने जिले में शैक्षिक नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) द्वारा आयोजित यह 10 दिवसीय कार्यशाला विशेष रूप से विद्यालयी शिक्षा में हस्तकला के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। इसका मुख्य लक्ष्य शिक्षकों को ऐसे तरीके सिखाना था जिनसे वे विद्यार्थियों के भीतर छिपी रचनात्मकता को बाहर ला सकें और उन्हें व्यावहारिक कौशल से लैस कर सकें। कार्यशाला का विषय 'विद्यालयी शिक्षा में हस्तकला कौशल का समावेश' अपने आप में शिक्षा के एक नए आयाम को दर्शाता है, जहाँ पारंपरिक कलाओं को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले शिक्षकों ने न केवल हस्तकला की विभिन्न तकनीकों का ज्ञान प्राप्त किया, बल्कि उन्होंने यह भी सीखा कि कैसे इन तकनीकों को कक्षा में प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है।
समाचार
दमोह के शिक्षकों ने राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेकर जिले का नाम रोशन किया
18 अक्टूबर 2026 को 11:52 pm बजे

दमोह के शिक्षकों ने राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेकर जिले का नाम रोशन किया
साझा करेंWhatsApp
