पटवारियों से 5 से 7 मकानों की रजिस्ट्री
भोपाल में स्वामित्व योजना के तहत जमीनों और मकानों की रजिस्ट्री का काम तकनीकी दिक्कतों की वजह से गंभीर बाधाओं का सामना कर रहा है। पोर्टल के धीमा चलने और सर्वर के लगातार डाउन रहने के कारण रजिस्ट्रियों की रफ्तार बेहद धीमी हो गई है। इससे प्रशासन द्वारा तय किए गए बड़े लक्ष्यों को पूरा करना पटवारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हालात यह हैं कि दिनभर मशक्कत के बाद भी एक पटवारी महज 5 से 7 मकानों की ही रजिस्ट्री कर पा रहा है। प्रशासन की ओर से इस योजना के तहत रोजाना 1000 से ज्यादा रजिस्ट्रियां करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। यह लक्ष्य वर्तमान गति को देखते हुए असंभव सा लग रहा है। समस्या की जड़ में सर्वर की अस्थिरता है। सुबह 6 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक सर्वर लगातार डाउन रहता है या पोर्टल बेहद धीमा चलता है। इस वजह से घंटों दफ्तरों में बैठने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। पटवारियों के लिए तय टारगेट तक पहुंचना असंभव सा नजर आ रहा है, जिससे प्रशासनिक अमले में हताशा है। इस योजना को लेकर पहले भी मैदानी स्तर पर विरोध के सुर उठ चुके हैं। शुरुआत में पटवारियों ने इस पूरी प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया था। शासन-प्रशासन स्तर से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने दोबारा काम शुरू किया था। अब एक बार फिर तकनीकी खामियों और सुस्त सर्वर के कारण काम में आ रही रुकावटों से प्रशासनिक अमले और मैदानी कर्मचारियों के बीच मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कर्मचारियों को अपने लक्ष्य पूरे करने में भारी परेशानी हो रही है। इस तकनीकी संकट के कारण न केवल पटवारियों का काम प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम जनता को भी रजिस्ट्री कराने में देरी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।

