जूनियर डॉक्टरों ने पुलिस चौकी की मांग को लेकर धरना दिया, जिससे गैर-जरूरी ऑपरेशन टाल दिए गए
गजराराजा मेडिकल कॉलेज ( ग्वालियर ) के जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से बुधवार को स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ को चांटा मारे जाने की घटना के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार कर धरना दिया। उनकी मांग है कि अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी स्थापित की जाए और दोषी पर कार्रवाई हो। इस हड़ताल के चलते गैर-जरूरी ऑपरेशन टाल दिए गए, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सीनियर डॉक्टरों को ओपीडी में मरीजों की हिस्ट्री लिखने और वार्डों में राउंड लेने जैसे काम संभालने पड़े। कई मरीज बिना इलाज के ही लौट गए, जिससे उनकी पीड़ा और बढ़ गई। अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था की लचर स्थिति पर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जुडा) के अध्यक्ष डॉ. धीराराम गुर्जर ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब डॉक्टरों पर हमला हुआ है। इससे पहले भी दो बार ऐसे हमले हो चुके हैं। उन्होंने सिटी स्कैन कक्ष में घुसकर मारपीट और धमकी देने जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया। गुर्जर ने इस बात पर हैरानी जताई कि दो दिन पहले शीतला माता मंदिर हादसे में घायलों का हाल जानने पहुंचे मुख्यमंत्री के दौरे पर जहां कड़ी सुरक्षा थी, वहीं डीन पर हमला हो गया। जुडा की मुख्य मांग हजार बिस्तर अस्पताल परिसर में तत्काल पुलिस चौकी की स्थापना है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन जारी रखेंगे। हालांकि, अधिष्ठाता के आग्रह पर जूनियर डॉक्टरों ने अपना धरना समाप्त कर दिया है और वे काम पर लौट आए हैं। जूनियर डॉक्टरों के काम पर लौटने के बावजूद, पुलिस चौकी की मांग पर वे अभी भी अड़े हुए हैं। इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई थी। ओपीडी में मरीजों की भीड़ लगी रही, लेकिन डॉक्टर नदारद थे। सीनियर डॉक्टरों ने मरीजों को संभालने की कोशिश की, लेकिन अपर्याप्त स्टाफ के कारण वे भी पूरी तरह सफल नहीं हो सके। हड़ताल से सबसे ज्यादा प्रभावित वे मरीज हुए जिन्हें तत्काल इलाज की जरूरत थी। कई ऑपरेशन टाल दिए गए, जिससे मरीजों की तकलीफ बढ़ गई। कुछ मरीजों को तो बिना इलाज के ही घर लौटना पड़ा। इस स्थिति से अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
