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मध्य प्रदेश में अब नया घर, मकान या दुकान बनाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है। सरकार भवन निर्माण की अनुमति के लिए नजूल एनओसी की अनिवार्यता को खत्म करने जा रही है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने बुधवार को ‘मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम 2012’ में संशोधन के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है। इस प्रस्ताव के तहत भवन और विकास अनुज्ञा के आवेदन के साथ लगने वाले नजूल एनओसी की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया जाएगा। सरकार ने इस संशोधन पर आम लोगों से 15 दिनों के भीतर दावे, आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। इन सुझावों पर विचार करने के बाद संशोधन को लागू किया जाएगा, जिससे निर्माण कार्य की प्रक्रिया सरल हो जाएगी। जानकारों का कहना है कि इस संशोधन के लागू होने से लोगों को भवन निर्माण का नक्शा पास कराने के लिए नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति लगाने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी। इससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से भी निजात मिलेगी और समय की बचत होगी। यह कदम निर्माण क्षेत्र में सुगमता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। वर्तमान में, मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के नियम 16(11) के तहत निर्माण अनुमति के आवेदन के साथ भू-स्वामित्व प्रमाणित करने वाले कई दस्तावेज अनिवार्य हैं। इनमें मुख्य रूप से विक्रय विलेख या पट्टा विलेख (रजिस्ट्री), खसरा-नक्शा और खतौनी अभिलेख के साथ-साथ नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति शामिल है। इन दस्तावेजों के बिना निर्माण की अनुमति प्राप्त करना संभव नहीं था। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, नियम 16 के उप-नियम (11) के खंड (ग) को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा। यह खंड विशेष रूप से नजूल एनओसी की अनिवार्यता से संबंधित था। वहीं, खंड (क) और (ख) यथावत रहेंगे। इसका मतलब है कि अब आवेदकों को केवल रजिस्ट्री/पट्टा और खसरा, खतौनी-नक्शा जैसे दस्तावेज ही आवेदन के साथ जमा करने होंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी मसौदा अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि सरकार लोगों से प्रतिक्रिया जानने के लिए 15 दिनों का समय दे रही है।
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