भोपाल के केरवा डैम में टीम ने गुरुवार को जमीनी सत्यापन पूरा किया। एनजीटी के आदेश पर हुई इस कार्रवाई का मकसद डैम की सीमा, कब्जों और एफटीएल का अंतिम निर्धारण करना है। टीम शुक्रवार को रिपोर्ट तैयार करेगी और उसे एनजीटी में पेश किया जाएगा। कमेटी रिपोर्ट में एफटीएल और बफर एरिया तय करने के लिए उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड, जलसंसाधन विभाग के कंटूर व टोपोग्राफिकल मैप और जलाशय की ऊंचाई से जुड़े तथ्यों को शामिल करेगी। एनजीटी ने यह प्रक्रिया तीन सप्ताह में पूरी करने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी और जमीनी सत्यापन को आधार बनाकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। रिपोर्ट अगली सुनवाई में रखी जानी है, जिसकी तारीख 29 अक्टूबर निर्धारित है। सितंबर में भी टीम डैम क्षेत्र का निरीक्षण कर चुकी है। पुराने रिकॉर्ड के अनुसार केरवा डैम का जलमग्न क्षेत्र लगभग 462.150 हेक्टेयर है। इसकी सीमा 1080 कंक्रीट ब्लॉकों और खंभों से चिह्नित की गई थी। मौजूदा सत्यापन में टीम यह भी देखेगी कि इनमें से कितने सीमा-चिह्न मौके पर मौजूद हैं। पहली जांच में केरवा जलाशय क्षेत्र में 33 अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे। रिकॉर्ड में 18 सरकारी भूमि और 15 निजी भूमि से जुड़ी संरचनाएं दर्ज हैं। एनजीटी ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर एफटीएल तय करने और फिर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। आदेश के बाद टीम गुरुवार को मौके पर पहुंची और भौतिक स्थिति का मिलान शुरू किया।
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केरवा डैम की सीमा और कब्जों की जांच कर रही एनजीटी टीम
23 अक्टूबर 2026 को 11:03 pm बजे
केरवा डैम की सीमा और कब्जों की जांच कर रही एनजीटी टीम
