अस्पताल ने घोषित किया अनफिट, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में धोखाधड़ी के आरोप में जेल की सजा पाए तीन बिल्डरों को न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इन बिल्डरों पर जमीन बेचने के नाम पर ठगी करने का आरोप है। ईओडब्ल्यू कोर्ट ने तीनों आरोपियों को रिमांड पर भेजा था, लेकिन मेडिकल जांच के लिए जेपी अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें अनफिट घोषित कर दिया। इसके बाद तीनों बिल्डरों को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया, जिससे वे जेल जाने से बच गए। इस घटना ने भोपाल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि कहीं जेल से बचने के लिए किसी दबाव में तो उन्हें भर्ती नहीं कराया गया। जिन बिल्डरों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उनमें रामनाथ शर्मा, श्यामनाथ शर्मा और अश्विनीनाथ शर्मा शामिल हैं। ये तीनों हरेकृष्ण कॉलोनाइजर और जानकी बिल्डर से जुड़े हुए हैं। इन पर ईओडब्ल्यू ने वर्ष 2019 में जमीन बेचने के नाम पर धोखाधड़ी करने के संबंध में एफआईआर दर्ज की थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, बीते 22 अक्टूबर को ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में चालान पेश किया, जिसके बाद कोर्ट ने तीनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने का आदेश दिया था। अदालत के आदेश के बाद, इन तीनों बिल्डरों को मेडिकल जांच के लिए जेपी अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच की और पाया कि वे न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के लिए चिकित्सकीय रूप से फिट नहीं हैं। डॉक्टरों के इस फैसले के बाद, तीनों को तत्काल अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी गई, जिसे तुरंत अमल में लाया गया। इस पूरी घटनाक्रम के कारण, तीनों बिल्डर जेल जाने के बजाय अस्पताल के बिस्तर पर हैं। जेल वारंट जारी होने के बावजूद, वे जेल नहीं पहुंच पाए हैं। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है, खासकर स्वास्थ्य व्यवस्था की निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया के सुचारू संचालन को लेकर।
