अपने बयानों से अक्सर सुर्खियों में रहने वाले गुना के विधायक पन्नालाल शाक्य ने गुरुवार को एक पत्रकार वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ पर तीखे कटाक्ष किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस उम्र में दिग्विजय सिंह अपने बेटे जयवर्धन सिंह को सिंहासन तक पहुंचाने के लिए पदयात्रा कर रहे हैं। शाक्य ने महाकाल दर्शन के दौरान गमछे को लेकर हुई घटना का जिक्र करते हुए सनातन, हिंदुत्व और धार्मिक प्रतीकों के सम्मान पर सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने वोट चोरी के आरोपों से लेकर गुना के विकास, गुलाबगंज सड़क, नगर पालिका की सफाई व्यवस्था और अपनी ही सरकार के रवैये तक पर बेबाकी से बात रखी। महाकाल से यात्रा शुरू करने वाले दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए शाक्य ने कहा कि जब वे महाकाल के दर्शन करने पहुंचे और किसी ने उन्हें महाकाल का गमछा पहनाया, तो उन्होंने गमछे पर टिप्पणी करते हुए उसे वापस कर दिया। शाक्य ने कटाक्ष किया कि अगर उन्हें उस गमछे से ही परेशानी थी तो यात्रा जावरा या अजमेर से शुरू कर लेते। महाकाल से यात्रा शुरू कर रहे हैं तो महाकाल के दिए प्रसाद का अपमान नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातनी होने और हिंदू परंपरा की बात करने वालों को हिंदुत्व के प्रतीकों को भी जीवित रखना चाहिए। विधायक ने दिग्विजय सिंह के परिवार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस उम्र में उन्हें अपने बेटे जयवर्धन और अनुज को अपने दम पर आगे बढ़ने देना चाहिए। बेटे को कब तक अंगुली पकड़कर चलाएंगे, जिसे जो बनना होगा, वह अपने बूते बन जाएगा। शाक्य ने आरोन का मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि वहां जोगियों की जमीन पर उनके विरोधियों से जुड़े लोगों ने कब्रिस्तान बना दिया। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में स्वाभिमान और समानता की बात कैसे की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि आरोन में मानस भवन अब तक नहीं बन पाया है। सनातन की बात करने वालों को इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि मानस भवन का निर्माण अब तक क्यों नहीं हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। पत्रकार वार्ता में शाक्य ने अपनी ही भाजपा सरकार को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “सरकार तो सरकार की है, सरकार हमारी नहीं है।
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विधायक शाक्य ने दिग्विजय सिंह पर साधा निशाना, कहा- प्रसाद का अपमान क्यों?
22 अक्टूबर 2026 को 11:08 pm बजे

विधायक शाक्य ने दिग्विजय सिंह पर साधा निशाना, कहा- प्रसाद का अपमान क्यों?
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