किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने किसानों को फसल कटाई के बाद खेतों में बची पराली न जलाने और उसके उचित प्रबंधन की सलाह दी है। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंचता है, जिससे उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। फसल अवशेषों का सही प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण के साथ खेतों की गुणवत्ता बनाए रखता है। विभाग के अनुसार, खेत में फसल अवशेष मिलाने से मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। किसान हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और वेस्ट डी-कम्पोजर की मदद से पराली का प्रबंधन कर सकते हैं।
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पराली न जलाएं, प्रबंधन से बढ़ाएं मिट्टी की उर्वरा शक्ति
22 अक्टूबर 2026 को 11:08 pm बजे
